दशहरा 2026: बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व, जानें पूजा विधि और कथा
- द्वारा प्रार्थना संपादकीय टीम
- प्रकाशित: 16 अक्टूबर 2026
- अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
- 5 मिनट

भारतवर्ष उत्सवों और पर्वों का देश है, जहाँ हर त्यौहार हमें धर्म, संस्कृति और जीवन के गहरे मूल्यों से जोड़ता है। इन्हीं महान पर्वों में से एक है—विजय दशमी, जिसे हम आम तौर पर दशहरा के नाम से जानते हैं। यह पर्व न केवल असत्य पर सत्य की, और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है, बल्कि यह हर व्यक्ति के भीतर छिपी बुराइयों (अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, और लोभ) का नाश करने की प्रेरणा भी देता है। जैसे-जैसे हम नए साल की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे लोगों के मन में दशहरा 2026 को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है कि यह पावन पर्व किस दिन पड़ रहा है, इसका शुभ मुहूर्त क्या होगा और इसकी पूजन परंपराएं क्या हैं।
इस विस्तृत लेख में हम दशहरा 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, रावण दहन का समय, शास्त्रीय दशहरा 2026 पूजा विधि, और इस दिन से जुड़ी पौराणिक विजय दशमी कथा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
दशहरा 2026 की तिथि और पंचांग के अनुसार गणना
सनातन पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजय दशमी का पर्व मनाया जाता है। नवरात्र के नौ दिनों तक माँ दुर्गा की आराधना करने के बाद, दसवें दिन इस महात्म्य पर्व का उल्लास देखने को मिलता है।
पंचांग की गणना के अनुसार, दशहरा 2026 का पर्व अक्टूबर माह में मनाया जाएगा। इस दिन आकाश में तारे उदय होने के समय यानी 'विजय मुहूर्त' का विशेष महत्व होता है। यही वह समय होता है जब क्षत्रिय वर्ग अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।
दशहरा 2026: शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय
किसी भी हिंदू पर्व में मुहूर्त का बहुत अधिक महत्व होता है। रावण दहन हमेशा प्रदोष काल में और उस समय किया जाता है जब दशमी तिथि व्याप्त हो और साथ ही श्रवण नक्षत्र का योग बन रहा हो।
- दशमी तिथि आरंभ: अक्टूबर 2026 (पंचांग अनुसार निर्धारित समयानुसार)
- दशमी तिथि समाप्त: अगले दिन प्रात:काल तक
- विजय मुहूर्त (विशिष्ट समय): दोपहर 02:00 बजे से लेकर 02:45 बजे के मध्य (लगभग)। यह समय सभी प्रकार के कार्यों की सिद्धि और शस्त्र पूजन के लिए उत्तम माना जाता है।
- रावण दहन का समय (प्रदोष काल): सूर्यास्त के पश्चात (संध्याकाल 05:55 बजे से रात्रि 08:30 बजे के बीच)। यह वह समय होता है जब आसमान में तारे टिमटिमा रहे होते हैं और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक: दशहरा का महत्व
बुराई पर अच्छाई की जीत का यह पावन पर्व हमें यह सिखाता है कि भले ही अधर्म और अहंकार की ताकतें कितनी भी शक्तिशाली क्यों न प्रतीत हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। रावण के पास अपार शक्ति, ज्ञान और सोने की लंका थी, परंतु उसका अहंकार और पराई स्त्री (माता सीता) का अपहरण उसके सर्वनाश का कारण बना।
दशहरा का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आत्मिक दृष्टि से भी अत्यंत गहरा है:
- अधर्म का नाश: यह पर्व हमें याद दिलाता है कि अधर्म का मार्ग चाहे कितना भी सुगम क्यों न लगे, उसका अंत पतन ही है।
- आत्म-विश्लेषण: यह दिन अपने भीतर के 'रावण' यानी क्रोध, मद, लोभ और वासना को पहचानने और उनका दहन करने का अवसर देता है।
- नया कार्य आरंभ: विजय दशमी को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। इस दिन बिना किसी पंचांग शोधन के कोई भी नया व्यापार, गृह प्रवेश, विद्यारंभ या स्वर्ण आभूषणों की खरीदी की जा सकती है।
दशहरा 2026 पूजा विधि: चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
इस पवित्र दिन पर विधि-विधान से भगवान श्रीराम, माता सीता, हनुमान जी और शस्त्रों की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं विस्तृत दशहरा 2026 पूजा विधि:
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: दशमी तिथि के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले या श्वेत वस्त्र) धारण करें।
- पूजा स्थल की शुद्धि: अपने घर के ईशान कोण में पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। वहां एक साफ चौकी बिछाकर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की तस्वीर या विग्रह स्थापित करें।
- षोडशोपचार पूजन: भगवान को रोली, अक्षत (चावल), पीले फूल, माला, और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित करें।
- नैवेद्य अर्पण: भगवान को मौसमी फल, खीर, और मिठाई का भोग लगाएं। तुलसी दल अवश्य शामिल करें।
- शस्त्र पूजन (विशेष विधान): विजय दशमी के दिन शस्त्रों की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन तलवार, त्रिशूल, या आजकल के संदर्भ में अपने वाहन, लैपटॉप, या कलम-दवात की भी पूजा रोली, अक्षत और पुष्प से करनी चाहिए।
- शमी वृक्ष की पूजा: शाम को प्रदोष काल में शमी के पेड़ के नीचे जाकर उसकी पूजा करें। शमी के वृक्ष के पास दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें। ऐसा माना जाता है कि शमी के वृक्ष में देवताओं का वास होता है और इसकी पूजा से शनि के कुप्रभावों से मुक्ति मिलती है।
विजय दशमी कथा: भगवान राम द्वारा रावण वध की पौराणिक गाथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, लंकापति रावण ने छलपूर्वक माता सीता का अपहरण कर लिया था। अपनी प्रिय पत्नी को मुक्त कराने और धर्म की स्थापना के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने वानर सेना के साथ समुद्र पर सेतु का निर्माण किया और लंका पर आक्रमण किया।
यह महायुद्ध कई दिनों तक चला। रावण के पास अमरता का वरदान था, क्योंकि उसकी नाभि में अमृत कुंड था। रावण को पराजित करना असंभव प्रतीत हो रहा था। तब भगवान श्रीराम के कुल गुरु और लंका के महाविद्वान विभीषण ने प्रभु राम को रहस्य बताया कि रावण की नाभि पर बाण चलाने से ही उसका वध संभव है।
आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन, भगवान श्रीराम ने अपने महाबाण से रावण की नाभि पर प्रहार किया, जिससे रावण का अंत हुआ। अहंकार और अधर्म का वह विशाल पर्वत ढह गया। इस प्रकार, देवताओं ने पुष्प वर्षा कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और तभी से यह दिन विजय दशमी के रूप में मनाया जाने लगा।
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, माता दुर्गा ने महिषासुर नामक महादैत्य के साथ नौ दिनों और रातों तक भीषण युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त किया था। इसलिए इस दिन को 'दुर्गा विसर्जन' और 'विश्राम दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है।
रावण दहन 2026: परंपरा और उसका संदेश
रावण दहन 2026 के अवसर पर देश के कोने-कोने में भव्य मेलों का आयोजन किया जाएगा। बड़े-बड़े मैदानों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले खड़े किए जाएंगे। सूर्यास्त के बाद जब ये पुतले अग्नि के हवाले किए जाते हैं, तो आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठता है।
यह दृश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि एक गहरा संदेश देता है कि चाहे रावण जैसा ज्ञानी और शक्तिशाली व्यक्ति भी क्यों न हो, यदि उसका आचरण अनैतिक है और वह दूसरों की स्त्रियों का अनादर करता है, तो उसका पतन निश्चित है। हमें अपने बच्चों को इस पुतला दहन के माध्यम से यही सिखाना चाहिए कि वे जीवन में कभी भी अहंकार और अधर्म का मार्ग न अपनाएं।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहा जाए तो दशहरा 2026 केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति का वह पावन स्तंभ है जो हमें बार-बार यह याद दिलाता है कि अंधेरा कितना भी घना क्यों न हो, एक छोटा सा दीया उसे हरा सकता है। इस विजय दशमी पर आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम अपने अंदर के सभी दुर्गुणों—क्रोध, द्वेष, लोभ और अहंकार—का दहन करेंगे और प्रेम, भाईचारा, और सत्य के मार्ग पर चलेंगे। आप सभी को दशहरा 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं!
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q: दशहरा 2026 का पर्व कब मनाया जाएगा?
सनातन पंचांग के अनुसार दशहरा 2026 का पर्व अक्टूबर माह में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाएगा।
Q: दशहरा 2026 में विजय मुहूर्त का समय क्या रहेगा?
विजय मुहूर्त दोपहर 02:00 बजे से लेकर 02:45 बजे के मध्य रहेगा, जो शस्त्र पूजन और कार्यों की सिद्धि के लिए उत्तम है।
Q: रावण दहन के लिए सबसे सही समय (प्रदोष काल) कौन सा माना जाता है?
रावण दहन सूर्यास्त के पश्चात संध्याकाल 05:55 बजे से रात्रि 08:30 बजे के बीच किया जाता है जब आसमान में तारे टिमटिमा रहे होते हैं।
Q: दशहरा का पर्व मुख्य रूप से किस बात का प्रतीक है?
यह पर्व असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
Q: दशहरा के दिन शस्त्र पूजन क्यों किया जाता है?
विजय मुहूर्त के दौरान क्षत्रिय वर्ग अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं, जिसे इस दिन की एक प्रमुख परंपरा माना गया है।
Q: दशहरा पर्व हमें आत्म-विश्लेषण के रूप में क्या सिखाता है?
यह दिन हमें अपने भीतर के 'रावण' यानी अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और वासना को पहचानने और उनका नाश करने की प्रेरणा देता है।
Q: क्या दशहरा के दिन कोई नया कार्य शुरू किया जा सकता है?
हाँ, विजय दशमी को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, इसलिए इस दिन बिना किसी पंचांग शोधन के नया व्यापार, गृह प्रवेश या स्वर्ण आभूषणों की खरीदी की जा सकती है।
Q: रावण के सर्वनाश का मुख्य कारण क्या था?
रावण के पास अपार शक्ति और ज्ञान था, परंतु उसका अहंकार और माता सीता का अपहरण उसके सर्वनाश का मुख्य कारण बना।
Q: दशहरा पर्व किस मास में और किस पक्ष में आता है?
यह पर्व हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
Q: दशहरा पर्व का संबंध किस त्यौहार के ठीक बाद से है?
यह पर्व नवरात्र के नौ दिनों तक माँ दुर्गा की आराधना करने के ठीक बाद दसवें दिन मनाया जाता है।
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