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तुम कहाँ खो गए हो श्याम ?

तुम कहाँ खो गए हो श्याम ?

एक बार स्वर्ग में विचरण करते समय श्री श्याम और राधा आमने सामने आ गए, राधा जी को देख कृष्ण विचलित से हो गए. जबकि राधा प्रसन्न लग रही थी. कृष्ण इसलिए विचलित से थे क्योंकि वे राधा से अलग होकर दुखी थे. जबकि राधा इसलिए प्रसंचीत थी क्योंकि वह श्री कृष्णा के प्रेम में डूबी हुई थी

राधा मुस्कुराई और श्री कृष्ण सकपकाए इससे पहले श्री कृष्ण कुछ भी कहते श्री राधिका ने कृष्ण जी से कहा-

"कैसे हो द्वारकाधीश महाराज ?"

जो राधा उन्हें कान्हा कान्हा कहकर बुलाया करती थी आज उसी के मुख से द्वारकाधीश का संबोधन कृष्ण को अंदर तक घायल कर गया" अपने को संभालते हुए कृष्ण बोले मै तो आज भी तुम्हारे लिए कान्हा ही हूं राधे तुम तो मुझे द्वारकाधीश मत कहो.

सच कहूं राधा जब भी तुम्हारी याद आती थी, इन आंखों से आंसू बह जाते थे I राधा बड़े विनर्म स्वाभाव से बोली- "मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ द्वारकाधीश, न ही मुझे तुम्हारी याद आई और ना ही मेरी आखो से आंसू आए"

द्वारकाधीस याद तो उसे किया जाता है, जिसे भुला दिया गया हो किन्तु तुम तो इन आंखों में सदा रहते थे, कही तुम इन आसुओ के साथ चले ना जाओ यह सोच के रोती भी नहीं थी. राधा ने बड़े दुखी स्वर में श्री कृष्ण से कहा- अगर सुन सको तो कुछ कड़वे शब्द कहूं द्वारकाधीश.. इस प्रेम से अलग होकर तुम कहा से कहा चले गए

यमुना का मीठा पानी छोड़ समुद्र के खारे पानी तक पहुँच गए कभी जिस उंगली से तुमने गोवर्धन पर्वत उठा कर लोगो की सहायता की थी, आज उसी उंगली से सुदर्शन उठालिया. दस उंगलियों से बजने वाली बांसुरी भूल गए और एक उंगली पर चलने वाले सुदर्शन पर भरोसा कर लिया. प्रेम से अलग होकर तुमने विनाश करने वाले सुदर्शन को चुन लिया है "प्रेम में रहकर मनुष्य विकास करता है और प्रेम से अलग होकर विनाश करता है"

कृष्ण तुम तो सभी शास्त्रों के ज्ञाता हो नीति निर्माता हो सभी कलाओ में माहिर हो फिर महाभारत युद्ध में क्या निर्णय लिया? महाभारत के युद्ध में तुमने क्या किया, कौरवों को खुद की सेना देकर, खुद पांडवो के साथ मिलकर उन पर शस्त्र चलवाए वो तो आपकी ही प्रजा थी और राजा उसका रक्षक होता है।

आप उसी रथ के सारथी थे जिस पर बैठकर अर्जुन आपकी ही प्रजा का विनाश कर रहा था अपनी प्रजा को ऐसा देख आपमें जरा सी भी करूणा नहीं जागी, क्योंकि आप प्रेम से शून्य हो गए थे कृष्ण। "प्रेम से जुड़े होते तो कौरव पांडव युद्ध नहीं समझौता होता" "कृष्ण युद्ध में और प्रेम में यही फर्क होता है युद्ध में आप मिटा करके जीतते है प्रेम में आप मिटकर के जीतते है" "प्रेम के ढूबा इंसान खुद दुखी तो रह सकता है पर किसी को दुख नहीं दे सकता" कृष्ण आज भी किसी भी मंदिर में जाकर देखो अपनी द्वारकाधीश वाली छवि को ढूंढते रह जओगे और हर जगह राधा को कृष्णा संग पाओगे.
बोलो राधे राधे. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: स्वर्ग में राधा और कृष्ण की पहली मुलाकात पर कृष्ण और राधा की क्या भावनाएँ थीं?

कृष्ण राधा से अलग होकर दुखी और विचलित थे, जबकि राधा उनके प्रेम में डूबी होने के कारण प्रसन्न थी।

Q: राधा ने कृष्ण को किस नाम से संबोधित किया और इसका कृष्ण पर क्या प्रभाव पड़ा?

राधा ने कृष्ण को 'द्वारकाधीश महाराज' कहकर संबोधित किया, जिससे कृष्ण अंदर तक घायल हो गए क्योंकि वे उन्हें 'कान्हा' कहकर बुलाया करती थीं।

Q: कृष्ण ने राधा के प्रति अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त किया?

कृष्ण ने कहा कि वे आज भी राधा के लिए कान्हा ही हैं और जब भी उन्हें राधा की याद आती थी, उनकी आँखों से आँसू बह जाते थे।

Q: राधा ने कृष्ण की याद में न रोने का क्या कारण बताया?

राधा ने कहा कि कृष्ण उनकी आँखों में सदा रहते थे, और वे इसलिए नहीं रोईं क्योंकि उन्हें डर था कि आँसुओं के साथ कृष्ण कहीं चले न जाएँ।

Q: राधा ने कृष्ण के प्रेम से अलग होकर उनके जीवन में आए किस बदलाव पर टिप्पणी की?

राधा ने कहा कि कृष्ण यमुना का मीठा पानी छोड़कर समुद्र के खारे पानी तक पहुँच गए और गोवर्धन पर्वत उठाने वाली उंगली से सुदर्शन चक्र उठा लिया, बांसुरी भूलकर सुदर्शन पर भरोसा कर लिया।

Q: राधा के अनुसार, प्रेम में रहने और प्रेम से अलग होने का मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

राधा ने कहा कि प्रेम में रहकर मनुष्य विकास करता है और प्रेम से अलग होकर विनाश करता है।

Q: राधा ने महाभारत युद्ध में कृष्ण की भूमिका पर क्या प्रश्न उठाए?

राधा ने प्रश्न उठाया कि सभी शास्त्रों के ज्ञाता होते हुए भी कृष्ण ने महाभारत युद्ध में अपनी ही प्रजा (कौरवों) को सेना देकर पांडवों से उन पर शस्त्र क्यों चलवाए, जिससे अपनी ही प्रजा का विनाश हुआ।

Q: राधा के अनुसार, महाभारत युद्ध में कृष्ण में करुणा का अभाव क्यों था?

राधा ने कहा कि कृष्ण प्रेम से शून्य हो गए थे, इसलिए अपनी प्रजा को ऐसा देखकर उनमें जरा सी भी करुणा नहीं जागी।

Q: राधा ने युद्ध और प्रेम में क्या मुख्य अंतर बताया?

राधा ने कहा कि युद्ध में आप मिटा करके जीतते हैं, जबकि प्रेम में आप मिटकर के जीतते हैं।

Q: आज के मंदिरों में कृष्ण और राधा की उपस्थिति के बारे में राधा की अंतिम टिप्पणी क्या थी?

राधा ने कहा कि आज भी किसी भी मंदिर में कृष्ण की द्वारकाधीश वाली छवि को ढूंढते रह जाएंगे और हर जगह राधा को कृष्णा संग पाएंगे।

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प्रार्थना संपादकीय टीम

प्रार्थना संपादकीय टीम आपकी आध्यात्मिक यात्रा का समर्थन करने के लिए दैनिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन, प्रामाणिक अनुष्ठान और प्राचीन सनातन शास्त्रों से गहरे अंतर्दृष्टि साझा करती है।

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