Navratri 2026: घटस्थापना से कन्या पूजन तक, जानिए सही विधि और शुभ मुहूर्त
- द्वारा प्रार्थना संपादकीय टीम
- प्रकाशित: October 8, 2026
- अंतिम अपडेट: October 8, 2026
- 8 Mins

हिन्दू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र, ऊर्जावान और उल्लाس से भरा हुआ माना जाता है। सालभर में कुल चार बार नवरात्रि आती हैं, जिनमें दो गुप्त नवरात्रि और दो मुख्य नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) शामिल होती हैं। जब हम बात करते हैं वर्ष 2026 की, तो यह पावन वर्ष देवी दुर्गा के भक्तों के लिए विशेष साधना और आराधना लेकर आ रहा है। माता रानी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि हर अनुष्ठान शास्त्रों में बताए गए नियमों और सही समय के अनुसार ही किया جائے۔
इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम नवरात्रि 2026 घटस्थापना और कन्या पूजन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों पर चर्चा करेंगे, जिसमें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना की विधि, नौ दिनों के स्वरूप और कन्या पूजन के नियम शामिल हैं।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि 2026: एक दृष्टि
वर्ष 2026 में आने वाली चैत्र शारदीय नवरात्रि 2026 का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि से हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत) की शुरुआत होती है, जबकि शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। दोनों ही अवसरों पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त नौ दिनों तक उपवास रखकर मां को प्रसन्न करते हैं।
घटस्थापना 2026: महत्व और शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के स्वागत और आह्वान के लिए घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए ताकि घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो सके।
नवरात्रि 2026 शुभ मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, घटस्थापना प्रतिपदा तिथि के शुरुआती समय या अभिजीत मुहूर्त में करना सबसे उत्तम माना जाता है। (पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार सटीक समय की पुष्टि अवश्य कर लें)। सामान्यतः सूर्योदय के पश्चात के पहले एक-दो घंटे घटस्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं। राहुकाल के दौरान घटस्थापना करने से बचना चाहिए।
घटस्थापना विधि 2026: चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
सही तरीके से कलश स्थापना करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। आइए जानते हैं घटस्थापना विधि 2026 के बारे में विस्तार से:
- स्थान की शुद्धि: नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा घर को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
- वेदी का निर्माण: पूजा स्थल पर एक साफ चौकी रखें और उसपर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। इस पर माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- जवा बोना (धान उगाना): चौकी के पास एक मिट्टी के बर्तन में शुद्ध मिट्टी डालकर उसमें जौ (जवा) के बीज बोएं। इस पर थोड़ा जल छिड़कें। यह बरकत और आने वाले अन्न का प्रतीक है।
- कलश स्थापना: तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाएं और उस पर मौली (कलवा) बांधें। कलश में गंगाजल, शुद्ध जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल) और दूर्वा डालें।
- आम या अशोक के पत्ते: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते रखें और उसके ऊपर एक ढक्कन रखें, जिसमें चावल भरे हों।
- नारियल स्थापित करना: जटा वाले नारियल पर लाल कपड़ा या चुनरी लपेटकर मौली से बांधें और इसे कलश के ऊपर रखें। नारियल का मुख आपकी तरफ या ऊपर की ओर होना चाहिए।
- दीपक प्रज्वलन: कलश स्थापना के पश्चात अखंड ज्योति या सामान्य घी का दीपक प्रज्वलित करें और गणेश जी का स्मरण करके पूजा का शुभारंभ करें।
नवरात्रि नौ दिन: माता के नौ स्वरूपों की साधना
नवरात्रि नौ दिन तक चलने वाला यह महापर्व देवी के नौ अलग-अलग रूपों को समर्पित है। हर दिन का अपना एक विशेष महत्व, रंग और भोग होता है:
- पहला दिन (प्रतिपदा): मां शैलपुत्री की पूजा (घटस्थापना)
- दूसरा दिन (द्वितीया): मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
- तीसरा दिन (तृतीया): मां चंद्रघंटा की पूजा
- चौथा दिन (चतुर्थी): मां कूष्मांडा की पूजा
- पाँचवा दिन (पंचमी): मां स्कंदमाता की पूजा (इसे षष्ठी या पंचमी तिथि के अनुसार भी देखा जाता है)
- छठा दिन (षष्ठी): मां कात्यायनी की पूजा
- सातवां दिन (सप्तमी): मां कालरात्रि की पूजा (महा Saptami)
- आठवां दिन (अष्टमी): मां महागौरी की पूजा (महाष्टमी और संधि पूजा)
- नौवां दिन (नवमी): मां सिद्धिदात्री की पूजा और महानवमी
कन्या पूजन विधि और नियम (अष्टमी या नवमी)
नवरात्रि का समापन कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। कई लोग अष्टमी के दिन तो कुछ लोग नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार, 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन श्रेष्ठ माना गया है।
कन्या पूजन विधि:
- कन्याओं और एक बालक (जो बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है) को आदर सहित अपने घर आमंत्रित करें।
- घर आने पर सभी कन्याओं के चरण धोएं और उन्हें साफ आसन पर बिठाएं।
- सभी के माथे पर कुमकुम, अक्षत और रोली का तिलक लगाएं।
- कन्याओं को हलवा, पूरी और काले चने का सात्विक प्रसाद श्रद्धापूर्वक परोसें।
- भोजन के पश्चात कन्याओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार (दक्षिणा, फल, श्रृंगार का सामान या पुस्तकें) भेंट करें।
- अंत में उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें विदा करें।
नवरात्रि के दौरान क्या करें और क्या न करें
व्रत और पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है ताकि साधना का पूरा फल मिल सके:
क्या करें (Do's):
- नौ दिनों तक घर में सात्विक माहौल बनाए रखें और लहसुन-प्याज के प्रयोग से बचें।
- नियमित रूप से सुबह और शाम के समय माता की आरती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- यदि आपने अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को अकेला न छोड़ें और उसकी निरंतर देखरेख करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें, इससे माता अति प्रसन्न होती हैं।
- अपने मन में सकारात्मक विचार रखें और किसी के प्रति द्वेष न रखें।
क्या न करें (Don'ts):
- व्रत के दौरान चमड़े की वस्तुओं (बेल्ट, पर्स आदि) के प्रयोग से बचें।
- बाल, नाखून काटना या दाढ़ी बनाना (अष्टमी/नवमी तक) वर्जित माना गया है।
- अपशब्दों का प्रयोग न करें और किसी का अपमान न करें।
- तामसिक भोजन (मांस, मदिरा) का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
- अगर घर में कलश स्थापना की है या अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को सूना न छोड़ें।
निष्कर्ष
नवरात्रि 2026 का यह महापर्व आपके जीवन में सुख, शांति, शक्ति और अपार सफलता लेकर आए। यदि आप सही मुहूर्त में घटस्थापना विधि 2026 का पालन करते हुए मां दुर्गा की आराधना करते हैं और अंत में सच्चे भाव से कन्या पूजन करते हैं, तो माता रानी की असीम कृपा आपके और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहेगी। आवश्यकता है तो केवल पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और अनुशासन की।
बोलो माता रानी की जय! शुभ नवरात्रि!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: वर्ष 2026 में नवरात्रि का पर्व क्यों महत्वपूर्ण है?
वर्ष 2026 का पावन वर्ष देवी दुर्गा के भक्तों के लिए विशेष साधना और आराधना लेकर आ रहा है, जिसमें शास्त्रों के नियमों के अनुसार अनुष्ठान करने पर माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Q: एक वर्ष में कुल कितनी बार नवरात्रि आती हैं?
सालभर में कुल चार बार नवरात्रि आती हैं, जिनमें दो गुप्त नवरात्रि और दो मुख्य नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) शामिल होती हैं।
Q: चैत्र और शारदीय नवरात्रि का सनातन संस्कृति में क्या महत्व है?
चैत्र नवरात्रि से हिन्दू नववर्ष यानी विक्रम संवत की शुरुआत होती है, जबकि शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है।
Q: घटस्थापना (कलश स्थापना) कब की जाती है?
घटस्थापना नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के स्वागत और आह्वान के लिए की जाती है।
Q: घटस्थापना के लिए कौन सा समय सबसे उत्तम माना गया है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घटस्थापना प्रतिपदा तिथि के शुरुआती समय, अभिजीत मुहूर्त या सूर्योदय के पश्चात के पहले एक-दो घंटे में करना सबसे उत्तम माना गया है।
Q: घटस्थापना के समय किस काल से बचना चाहिए?
घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए और राहुकाल के दौरान घटस्थापना करने से बचना चाहिए।
Q: घटस्थापना विधि के तहत पूजा स्थल की शुद्धि कैसे की जाती है?
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा घर को अच्छी तरह साफ किया जाता है और गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र किया जाता है।
Q: कलश में कौन-कौन सी चीजें डाली जाती हैं?
कलश में गंगाजल, शुद्ध जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल) और दूर्वा डाली जाती है।
Q: कलश के ऊपर नारियल कैसे स्थापित किया जाता है?
जटा वाले नारियल पर लाल कपड़ा या चुनरी लपेटकर मौली से बांधा जाता है और इसे कलश के ऊपर रखे पत्तों और ढक्कन के ऊपर स्थापित किया जाता है, जिसका मुख आपकी तरफ या ऊपर की ओर होना चाहिए।
Q: चौकी पर जौ (जवा) बोने का क्या महत्व है?
चौकी के पास मिट्टी के बर्तन में जौ बोए जाते हैं और उस पर जल छिड़का जाता है, जो बरकत और आने वाले अन्न का प्रतीक माना जाता है।
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