Navratri (2026) Day 2 : जानिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, कथा और प्रिय भोग
- द्वारा प्रार्थना संपादकीय टीम
- प्रकाशित: October 12, 2026
- अंतिम अपडेट: October 12, 2026
- 8 Mins

चैत्र और शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। Navratri Day 2 पर मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी का यह रूप त्याग, तपस्या, संयम और वैराग्य का प्रतीक है। जो साधक सच्चे मन से इनकी आराधना करता है, उसके जीवन में सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि वर्ष 2026 में नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि क्या है, उनकी पौराणिक कथा क्या है और उन्हें कौन सा भोग अति प्रिय है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व
मां ब्रह्मचारिणी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है—'ब्रह्म' यानी तपस्या और 'चारिणी' यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार, ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ—तप का आचरण करने वाली। मां के इस स्वरूप के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। मां श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और अत्यंत शांत एवं सौम्य मुद्रा में विराजमान रहती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने देवर्षि नारद के उपदेश से भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक उन्होंने केवल कंद-मूल, फल और पत्तों का आहार किया, इसके बाद कई वर्षों तक केवल सूखे बिल्व पत्र खाए और अंत में निर्जला रहकर कठिन तपस्या की। उनकी इसी कठिन तपस्या के कारण उन्हें 'ब्रह्मचारिणी' नाम प्राप्त हुआ।
नवरात्रि दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी का ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व
नवरात्रि दूसरा दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद खास माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होता है या मंगल दोष होता है, उन्हें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से विशेष लाभ मिलता है। इनकी कृपा से व्यक्ति के भीतर साहस, पराक्रम, ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है। मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि (Maa Brahmacharini Puja Vidhi)
नवरात्रि के दूसरे दिन विधि-विधान से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि:
- प्रातःकाल स्नान और संकल्प: नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले या सफेद रंग के) धारण करें। पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें।
- कलश स्थापना और चौकी पूजन: यदि आपने पहले दिन घटस्थापना की है, तो दूसरे दिन भी मां की प्रतिमा या तस्वीर के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। मां को सफेद या पीले रंग के पुष्प अर्पित करें।
- रोली, अक्षत और चंदन: माता को रोली, अक्षत (चांद), सिंदूर और चंदन लगाएं। मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें सफेद फूल, खासकर मोगरा या कमल का फूल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
- मंत्र जाप: पूजा के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें। माता का ध्यान करते हुए उनके बीज मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करना चाहिए।
- आरती और पुष्पांजलि: पूजा के अंत में मां ब्रह्मचारिणी की कपूर और घी के दीपक से आरती उतारें। इसके बाद क्षमा प्रार्थना करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
मां ब्रह्मचारिणी के प्रमुख मंत्र
पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से मां अति प्रसन्न होती हैं:
- ध्यान मंत्र:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमार्॥ - या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- मूल मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
मां ब्रह्मचारिणी कथा (Maa Brahmacharini Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, अपने पूर्व जन्म में इस देवी ने पुत्री रूप में हिमालय के घर जन्म लिया था और नारद जी के उपदेश से भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण उनका नाम 'ब्रह्मचारिणी' पड़ा।
हजारों वर्षों तक उन्होंने खुले आसमान के नीचे धूप, वर्षा और ठंड सहन करते हुए केवल कंद-मूल और फलों का आहार लिया। इसके बाद उन्होंने कई हजार वर्षों तक सूखे नीम के पत्ते चबाए और अंत में केवल हवा और जल के सहारे जीवित रहकर कठोर तप किया। उनके इस विकट तप को देखकर तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। सभी देवता, ऋषि-मुनि उनकी इस तपस्या की सराहना करने लगे और कहने लगे कि आज तक ऐसी तपस्या किसी ने नहीं की।
अंत में भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और उनकी मनोकामना पूर्ण करते हुए उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। यह कथा हमें सिखाती है कि यदि मनुष्य अपने लक्ष्य के प्रति पूरी निष्ठा, संयम और दृढ़ संकल्प रखे, तो वह किसी भी कठिन परिस्थिति को पार कर सकता है।
ब्रह्मचारिणी प्रिय भोग (Brahmacharini Priy Bhog)
मां ब्रह्मचारिणी को भोगस्वरूप क्या अर्पित किया जाए, इसे लेकर भक्तों में काफी उत्साह रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- पंचामृत और चीनी: मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, चीनी और पंचामृत का भोग अत्यंत प्रिय है। माता को भोग में शक्कर या मिश्री का प्रसाद चढ़ाने से लंबी आयु का वरदान और आरोग्यता मिलती है।
- पंचमेवा और फल: इसके अलावा आप माता को ताजे फल, मखाने और पंचमेवा का भोग भी लगा सकते हैं।
- ब्राह्मण को दान: ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन चीनी या पंचामृत का भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटना चाहिए और कुछ हिस्सा ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करना चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलने वाले लाभ
मां ब्रह्मचारिणी की साधना करने वाले साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- संयम और वैराग्य की प्राप्ति: मां की कृपा से व्यक्ति के अंदर क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार जैसी बुराइयों का नाश होता है। मन में शांति और स्थिरता आती है।
- विद्या और एकाग्रता: जो विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में एकाग्रता चाहते हैं, उनके लिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।
- संकटों का नाश: जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं और रुकावटें माता के आशीर्वाद से दूर हो जाती हैं।
निष्कर्ष
नवरात्रि का दूसरा दिन आत्म-संयम, साधना और आंतरिक शक्ति को जागृत करने का अवसर है। Navratri Day 2 पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा सच्चे हृदय से करने पर जीवन की हर कठिनाई से लड़ने की शक्ति मिलती है। इस बार माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि का पालन करते हुए विधि-विधान से माता की आराधना करें, उन्हें उनका ब्रह्मचारिणी प्रिय भोग अर्पित करें और मां से सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त करें। माता रानी सबकी झोली खुशियों से भर दें—जय माता दी!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: नवरात्रि के दूसरे दिन किसकी पूजा की जाती है?
नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
Q: मां ब्रह्मचारिणी का नाम कैसे पड़ा?
मां ब्रह्मचारिणी का नाम दो शब्दों 'ब्रह्म' (तपस्या) और 'चारिणी' (आचरण करने वाली) से मिलकर बना है। उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी, जिसके कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।
Q: मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कैसा है?
मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। वह श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और अत्यंत शांत एवं सौम्य मुद्रा में विराजमान रहती हैं।
Q: वर्ष 2026 में नवरात्रि के दूसरे दिन किस देवी की उपासना का विधान है?
वर्ष 2026 में नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना का विधान है।
Q: मां ब्रह्मचारिणी किस ग्रह को नियंत्रित करती हैं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं।
Q: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से किस ग्रह दोष में लाभ मिलता है?
जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होता है या मंगल दोष होता है, उन्हें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से विशेष लाभ मिलता है।
Q: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में किस रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है?
पूजा के दौरान पीले या सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
Q: मां ब्रह्मचारिणी को कौन सा रंग और पुष्प प्रिय हैं?
मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। उन्हें सफेद फूल, विशेषकर मोगरा या कमल का फूल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
Q: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए?
पूजा के दौरान मां का ध्यान करते हुए उनके बीज मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करना चाहिए।
Q: मां ब्रह्मचारिणी ने किसकी तपस्या की थी?
मां ब्रह्मचारिणी ने देवर्षि नारद के उपदेश से भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
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