Choti Diwali 2026: कब है नरक चतुर्दशी? जानें शुभ मुहूर्त और यम का दीया जलाने का समय
- द्वारा प्रार्थना संपादकीय टीम
- प्रकाशित: October 8, 2026
- अंतिम अपडेट: October 9, 2026
- 5 Mins

रोशनी का महापर्व दीपावली सनातन धर्म का सबसे बड़ा और प्रमुख उत्सव है। पांच दिनों तक चलने वाले इस दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। धनतेरस के ठीक अगले दिन और मुख्य दिवाली से एक दिन पूर्व छोटी दिवाली मनाई जाती है, जिसे नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष छोटी दिवाली 2026 का पर्व धार्मिक दृष्टि से बहुत खास है, क्योंकि इस दिन यमराज की पूजा और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए दीपदान किया जाता है।
यदि आप भी यह जानना चाहते हैं कि वर्ष 2026 में नरक चतुर्दशी 2026 कब है, इसका छोटी दिवाली शुभ मुहूर्त क्या है, और यम का दीया जलाने का समय क्या है, तो इस लेख में आपको संपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी मिलेगी। आइए जानते हैं छोटी दिवाली से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
छोटी दिवाली 2026 कब है? (Narak Chaturdashi 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली मनाई जाती है। वर्ष 2026 में चतुर्दशी तिथि का आरंभ और समापन कब हो रहा है, इसकी सही तिथि और समय की जानकारी होना आवश्यक है ताकि आप विधि-विधान से पूजा कर सकें।
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 2026 में कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ (संभावित तिथि के अनुसार) पंचांगीय गणना के आधार पर तय समय पर होगा।
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: इस दिन सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि होने के कारण स्नान और यमराज की पूजा इसी दिन की जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष विधान है, क्योंकि इसी दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव (कुछ परंपराओं के अनुसार) भी मनाया जाता है। इसके अलावा, इस दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध कर 16,104 कन्याओं को उसके चंगुल से मुक्त कराया था, जिसके उपलक्ष್ಯ में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।
छोटी दिवाली 2026 शुभ मुहूर्त और यम का दीया जलाने का समय
छोटी दिवाली शुभ मुहूर्त और दीपदान का समय इस पर्व का सबसे मुख्य हिस्सा है। इस दिन दो विशेष समय बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं—पहला सुबह का ब्रह्म मुहूर्त स्नान और दूसरा शाम को यमराज के निमित्त दीया जलाना।
1. यम का दीया जलाने का समय (Ym Ka Diya Jalane Ka Samay)
नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय मुख्य द्वार पर या घर के दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है। इसे 'यम का दीया' कहा जाता है।
- सही समय: प्रदोष काल और निशीथ काल के संधिकाल में यानी शाम को प्रदोश बेला में यम का दीया जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- दिशा: यम का दीपक हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है।
- दीपक का प्रकार: इस दिन आटे का चौमुखी (चार मुख वाला) दीपक बनाया जाता है जिसमें सरसों का तेल डाला जाता है और चार बत्तियां लगाई जाती हैं।
2. सुबह का अभ्यंग स्नान मुहूर्त (Roop Chaturdashi Snan Muhurat)
छोटी दिवाली को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तेल और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है।
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान समय: सूर्योदय से लगभग 1 से 2 घंटे पूर्व (प्रातः काल 04:00 बजे से 06:00 बजे के बीच) का समय स्नान के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
- ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति सूर्योदय से पहले अपामार्ग (चिरचिटा) की पत्तियां सिर पर रखकर स्नान करता है, उसे नरक के दुखों का सामना नहीं करना पड़ता और उसके रूप-सौंदर्य में वृद्धि होती है।
छोटी दिवाली पूजा विधि (Choti Diwali Puja Vidhi)
छोटी दिवाली पूजा विधि बहुत सरल लेकिन अत्यधिक प्रभावशाली है। इस दिन की पूजा में यमराज, भगवान श्री कृष्ण, माता काली और हनुमान जी की उपासना की जाती है। पूजा की विधि निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाती है:
- ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह जल्दी उठकर तिलों का तेल शरीर पर लगाकर और जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
- यमराज का आह्वान: संध्या के समय प्रदोष काल में स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद आटे का एक चौमुखी दीपक तैयार करें।
- दीपदान: दीपक में सरसों का तेल भरकर उसमें चार बत्तियां जलाएं। अब इस दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर या चौराहे पर रखें।
- मंत्र उच्चारण: यमराज का दीया जलाते समय उनकी स्तुति करें और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति तथा परिवार की रक्षा के लिए प्रार्थना करें। मंत्र का जप करें: "मृत्युना पाशदण्डेभ्यां कालेन च मया सह, द्वादश्या सूर्यजः प्रयुक्तः प्रदच्छद दीपदानं सूर्यप्रदोषकृत्।"
- भगवान कृष्ण और हनुमान जी की पूजा: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। श्री कृष्ण और हनुमान जी को मिठाई का भोग लगाएं और उनकी आरती करें।
नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व
छोटी दिवाली का पर्व केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे पौराणिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं। नरक चतुर्दशी 2026 के अवसर पर इन कथाओं को याद करना हमारे संस्कारों को मजबूत करता है:
- नरकासुर वध की कथा: प्रागैज्योतिषपुर के राजा नरकासुर ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए देवताओं और ऋषियों को परेशान कर रखा था और 16,104 स्त्रियों को बंधक बना लिया था। भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से कार्तिक चतुर्दशी के दिन ही इस क्रूर राक्षस का वध किया था और बंधक बनाई गई महिलाओं को समाज में सम्मान दिलाया था। इसी विजय की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है।
- रूप चतुर्दशी और सौंदर्य: राजा बाली के अहंकार को चूर करने और भगवान वामन द्वारा तीनों लोकों को मुक्त कराने की कथा भी इससे जुड़ी है। इस दिन रूप और स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए उबटन स्नान का विधान है।
- यम दीपदान का महत्व: मान्यता है कि इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने से परिवार के किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और नरक यातनाओं से मुक्ति मिलती है।
छोटी दिवाली पर ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इस दिन कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है:
- छोटी दिवाली की रात को घर के सभी कोनों में छोटे-छोटे दीये जलाने चाहिए ताकि घर से नकारात्मक ऊर्जा और अंधकार दूर हो सके।
- इस दिन घर के मुख्य द्वार को साफ-सुथरा रखें और रंगोली अवश्य बनाएं, क्योंकि इससे मां लक्ष्मी का आगमन होता है।
- क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूर रहें तथा घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
निष्कर्ष
छोटी दिवाली 2026 का पर्व अंधकार पर प्रकाश की और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। नरक चतुर्दशी हमें यह सिखाती है कि हमें अपने भीतर के अहंकार, अज्ञान और बुरा रूपी 'नरकासुर' का अंत करना चाहिए। इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ छोटी दिवाली शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए स्नान करें और यम का दीया जलाने का समय पर दीपदान अवश्य करें। ऐसा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।
आप सभी को हमारी ओर से छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: छोटी दिवाली 2026 कब मनाई जाएगी?
छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, वर्ष 2026 में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी।
Q: नरक चतुर्दशी को और किन नामों से जाना जाता है?
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है।
Q: छोटी दिवाली के दिन किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन मुख्य रूप से यमराज की पूजा, हनुमान जी की पूजा और श्री कृष्ण की आराधना की जाती है।
Q: यम का दीया जलाने का सही समय क्या है?
यम का दीया प्रदोष काल और शाम के समय जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Q: यम का दीपक किस दिशा में जलाया जाता है?
यम का दीपक हमेशा घर के मुख्य द्वार पर या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी गई है।
Q: यम का दीया किस चीज़ का बनाया जाता है?
यम का दीया आटे का चौमुखी (चार मुख वाला) बनाया जाता है, जिसमें सरसों का तेल और चार बत्तियां लगाई जाती हैं।
Q: छोटी दिवाली के दिन स्नान का शुभ मुहूर्त क्या है?
सूर्योदय से लगभग 1 से 2 घंटे पूर्व (प्रातः काल 04:00 बजे से 06:00 बजे के बीच ब्रह्म मुहूर्त में) स्नान करना सर्वोत्तम माना गया है।
Q: रूप चतुर्दशी के दिन स्नान की क्या परंपरा है?
इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है।
Q: नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने इस दिन नरकासुर राक्षस का वध किया था और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है।
Q: छोटी दिवाली दीपोत्सव के किस दिन आती है?
छोटी दिवाली धनतेरस के ठीक अगले दिन और मुख्य दिवाली से एक दिन पूर्व मनाई जाती है।
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