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Diwali 2026: घर बैठे कैसे करें लक्ष्मी पूजा? जानें संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

Diwali 2026: घर बैठे कैसे करें लक्ष्मी पूजा? जानें संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

रोशनी और खुशियों का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। साल 2026 में दिवाली का यह पवित्र पर्व हमारे जीवन में नई उम्मीदें, सुख और समृद्धि लेकर आ रहा है। इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और जिस घर में विधि-विधान से साफ-सफाई और पूजा होती है, वहां वे वास करती हैं।

अगर आप इस साल अपने परिवार के साथ दीपावली लक्ष्मी पूजा 2026 को घर पर ही बेहद श्रद्धा और पारंपरिक तरीके से करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए, इस विस्तृत गाइड में जानते हैं कि इस साल लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है, किन-किन सामग्रियों की आवश्यकता होगी और घर बैठे स्टेप-बाय-स्टेप पूजा कैसे संपन्न करें।

दीपावली 2026 कब है और पूजा का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में दीपावली का यह महापर्व बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। इस दिन प्रदोष काल और वृषभ लग्न में माता लक्ष्मी की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुई थी। साथ ही, इसी दिन भगवान श्री राम 14 साल का वनवास काटकर और रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे। इसलिए, घर में दीप जलाकर और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करके हम अपने जीवन से अंधकार (अज्ञान, गरीबी, और दुखों) को दूर करते हैं और प्रकाश (ज्ञान, धन, और सौभाग्य) का स्वागत करते हैं।

दिवाली पूजा शुभ मुहूर्त 2026 (Diwali 2026 Shubh Muhurat)

सही समय पर की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है। दिवाली पूजा शुभ मुहूर्त 2026 के लिए पंचांग के अनुसार निम्नलिखित समय सबसे उत्तम माने गए हैं:

  • प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 05:45 बजे से रात 08:15 बजे तक
  • वृषभ लग्न मुहूर्त (स्थिर लग्न): शाम 06:20 बजे से रात 08:18 बजे तक (यह समय व्यापारिक और गृहस्थ पूजा दोनों के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है)
  • निशिता काल मुहूर्त (तांत्रिका और विशेष अनुष्ठान के लिए): रात्रि 11:40 बजे से देर रात 12:31 बजे तक

गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न का समय घर पर पूजा करने के लिए सबसे उत्तम है, क्योंकि इस दौरान स्थिर लग्न होने से माँ लक्ष्मी आपके घर में लंबे समय तक वास करती हैं।

लक्ष्मी गणेश पूजा सामग्री लिस्ट (Samagri List)

पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्रियों को एक जगह एकत्रित कर लें ताकि बीच में आपको उठना न पड़े। लक्ष्मी गणेश पूजा सामग्री की पूरी सूची नीचे दी गई है:

  • माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मिट्टी या धातु की मूर्तियां (ध्यान रहे, गणेश जी की सूंड बाईं ओर होनी चाहिए और लक्ष्मी जी कमल के आसन पर विराजमान हों)।
  • चौकी (लकड़ी की नई पाटे या चौकी), लाल या पीला साफ कपड़ा।
  • पूजा के लिए कलश (तांबे या मिट्टी का), गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल।
  • अक्षत (बिना टूटे हुए चावल), रोली, सिंदूर, हल्दी, कलावा (मौली)।
  • पान के पत्ते, सुपारी, इलायची, लौंग, बताशे, खील-बताशा, और मिठाई।
  • ऋतु फल (केला, अनार, सेब आदि), अनार माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय है।
  • कमल का फूल (यदि मिल जाए तो अति उत्तम) या गेंदे के फूलों की माला।
  • शुद्ध घी का दीपक, तैल का दीपक (अखंड जोत के लिए), धूपबत्ती, अगरबत्ती, कपूर।
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण)।
  • एक छोटी थाली आरती के लिए और चांदी या सोने का सिक्का (पूजा के समय रखने के लिए)।
  • व्यवसाय से जुड़े लोग अपनी तिजोरी, बही-खाता या लैपटॉप/कंप्यूटर भी पूजा स्थल पर रख सकते हैं।

घर बैठे लक्ष्मी पूजा विधि: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड (Step-by-Step Puja Vidhi)

अगर आप पहली बार या हर साल की तरह इस बार भी घर बैठे लक्ष्मी पूजा विधि को अपनाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

1. घर की सफाई और स्नानादि

दिवाली की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र (विशेषकर पीले या लाल रंग के) धारण करें। पूरे घर की अच्छे से साफ-सफाई करें, क्योंकि माँ लक्ष्मी वहीं वास करती हैं जहाँ स्वच्छता होती है। मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों की तोरण लगाएं और सुंदर रंगोली बनाएं।

2. पूजा स्थल की स्थापना

घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या पूजा घर में एक चौकी रखें। उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी के बीच में थोड़े से चावल (अक्षत) की ढेरी बनाकर उस पर कलश रखें। कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखकर उसके ऊपर नारियल स्थापित करें।

3. मूर्तियों की स्थापना

चौकी पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करें। नियम के अनुसार, भगवान गणेश को हमेशा माता लक्ष्मी के दाहिनी ओर (आपके बाएं हाथ की तरफ) विराजित करना चाहिए। मूर्तियों के सामने एक चांदी का सिक्का और अपनी तिजोरी की चाबी या बही-खाता रख लें।

4. संकल्प और आचमन

दाएं हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प लें (अपने मन में भगवान से प्रार्थना करें कि हे ईश्वर, मैं अमुक नाम, अमुक गोत्र वाला, परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह पूजा कर रहा हूँ)। इसके बाद आचमन करें और अपने ऊपर व पूजा सामग्री पर जल छिड़ककर पवित्र करें।

5. गणेश और लक्ष्मी पूजन

सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश का आह्वान करें। उन्हें रोली, अक्षत, कलावा, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी का आह्वान करें और उन्हें सिंदूर, रोली, अक्षत, कमल का फूल, श्रृंगार का सामान और माला अर्पित करें।

6. भोग और नैवेद्य अर्पण

माता लक्ष्मी और गणेश जी को खील-बताशा, मिठाई, फल, पान का पत्ता, सुपारी और लौंग-इलायची का भोग लगाएं। माता लक्ष्मी को खासकर खीर या सफेद मिठाई का भोग बहुत पसंद है।

7. दीपावली पूजा मंत्र जाप

पूजा के दौरान माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के मूल मंत्रों का कम से कम 1 माला (108 बार) या श्रद्धा अनुसार जाप जरूर करें।

दीपावली पूजा मंत्र (Diwali Puja Mantra)

पूजा के समय नीचे दिए गए दीपावली पूजा मंत्र का उच्चारण करने से घर में बरकत आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है:

  • श्री गणेश मंत्र:
    "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"
  • माता लक्ष्मी का महामंत्र:
    "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥"
  • धन प्राप्ति और कुबेर मंत्र:
    "ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥"

आरती, क्षमा प्रार्थना और दीप प्रज्वलन

मंत्र जाप के पश्चात शुद्ध घी का दीपक और कपूर जलाकर पहले भगवान गणेश की और फिर माता लक्ष्मी की आरती गाएं। आरती के बाद दोनों हाथ जोड़कर भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें— "आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥"

पूजा संपन्न होने के बाद, घर के सभी कमरों में, मुख्य द्वार पर, तुलसी के पास और छत पर मिट्टी के दीपक (दिये) जलाकर रखें। इस प्रकार आपकी दीपावली लक्ष्मी पूजा 2026 पूर्ण विधि-विधान के साथ संपन्न होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दीपावली का यह पावन पर्व केवल बाहरी रोशनी का नहीं, बल्कि हमारे भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और अज्ञान के अंधकार को मिटाकर प्रेम और सद्भाव का दीया जलाने का समय है। इस लेख में बताई गई घर बैठे लक्ष्मी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त का पालन करके आप भी वर्ष 2026 की दिवाली पर माता लक्ष्मी और गणेश जी की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

हमारी तरफ से आपको और आपके पूरे परिवार को दीपावली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! माता लक्ष्मी आपके घर में सदा सुख, शांति और धन-धान्य का भंडार भरे रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: साल 2026 में दिवाली का त्योहार क्यों खास माना जा रहा है?

वर्ष 2026 में दीपावली का महापर्व बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है, इस दिन प्रदोष काल और वृषभ लग्न में माता लक्ष्मी की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है जो जीवन में नई उम्मीदें, सुख और समृद्धि लेकर आता है।

Q: दीपावली का पर्व किस तिथि को मनाया जाता है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, दीपावली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।

Q: दीपावली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का क्या महत्व है?

ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और जिस घर में विधि-विधान से साफ-सफाई और पूजा होती है, वहां वे वास करती हैं। इसके अलावा इससे जीवन से अंधकार दूर होता है और प्रकाश, धन व सौभाग्य का स्वागत होता है।

Q: गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए दिवाली पूजा का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न का समय घर पर पूजा करने के लिए सबसे उत्तम है, क्योंकि इस दौरान स्थिर लग्न होने से माँ लक्ष्मी घर में लंबे समय तक वास करती हैं।

Q: वर्ष 2026 में प्रदोष काल मुहूर्त का समय क्या है?

साल 2026 में प्रदोष काल मुहूर्त शाम 05:45 बजे से रात 08:15 बजे तक रहेगा।

Q: वृषभ लग्न मुहूर्त (स्थिर लग्न) का समय कब से कब तक है?

वृषभ लग्न मुहूर्त शाम 06:20 बजे से रात 08:18 बजे तक रहेगा, जो व्यापारिक और गृहस्थ पूजा दोनों के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

Q: निशिता काल मुहूर्त का समय क्या है और यह किसके लिए उत्तम है?

निशिता काल मुहूर्त रात्रि 11:40 बजे से देर रात 12:31 बजे तक है, जो तांत्रिकों और विशेष अनुष्ठानों के लिए उत्तम माना जाता है।

Q: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली की रात क्या हुआ था?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं और इसी दिन भगवान श्री राम 14 साल का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे।

Q: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि भगवान गणेश की सूंड बाईं ओर होनी चाहिए और माता लक्ष्मी कमल के आसन पर विराजमान होनी चाहिए।

Q: लक्ष्मी गणेश पूजा सामग्री लिस्ट में कौन-कौन सी मुख्य वस्तुएं शामिल हैं?

पूजा सामग्री में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, लकड़ी की चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, अक्षत, रोली, सिंदूर, हल्दी, कलावा, पान के पत्ते, सुपारी, खील-बताशा, ऋतु फल और शुद्ध घी का दीपक शामिल हैं।

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प्रार्थना संपादकीय टीम

प्रार्थना संपादकीय टीम आपकी आध्यात्मिक यात्रा का समर्थन करने के लिए दैनिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन, प्रामाणिक अनुष्ठान और प्राचीन सनातन शास्त्रों से गहरे अंतर्दृष्टि साझा करती है।

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