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24 जुलाई 2026 पुत्रदा एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा से पाएं संतान का वरदान

24 जुलाई 2026 पुत्रदा एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा से पाएं संतान का वरदान

24 जुलाई 2026 पुत्रदा एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा से पाएं संतान का वरदान

सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित तिथि है, और प्रत्येक एकादशी अपने विशिष्ट फलों के लिए जानी जाती है। इनमें से एक विशेष एकादशी है पुत्रदा एकादशी, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पुत्र देने वाली एकादशी'। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना जाता है, जो संतान सुख से वंचित हैं और एक स्वस्थ व नेक संतान की कामना करते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु की असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सीधा मार्ग है।

वर्ष 2026 में, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 24 जुलाई 2026 को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से न केवल संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह लेख आपको पुत्रदा एकादशी व्रत के महत्व, विस्तृत पूजा विधि, व्रत कथा और संतान प्राप्ति के लिए इसके विशेष फलों के बारे में गहन जानकारी प्रदान करेगा।

पुत्रदा एकादशी क्या है? (What is Putrada Ekadashi?)

पुत्रदा एकादशी, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, पुत्र (संतान) प्रदान करने वाली एकादशी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में दो पुत्रदा एकादशी आती हैं। पहली पौष मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में। इनमें से श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह चातुर्मास के दौरान आती है, जब भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं और उनकी पूजा का फल कई गुना अधिक होता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ उनके विभिन्न अवतारों की भी पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को निःसंतानता के दुख से मुक्ति मिलती है और उसे सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। यह केवल पुत्र के लिए नहीं, बल्कि एक अच्छी, संस्कारी और यशस्वी संतान के लिए किया जाने वाला व्रत है।

24 जुलाई 2026 पुत्रदा एकादशी का शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings for 24 July 2026 Putrada Ekadashi)

किसी भी व्रत का शुभ फल प्राप्त करने के लिए उसका सही समय पर संकल्प लेना और पारण करना अत्यंत आवश्यक है। 24 जुलाई 2026 एकादशी के लिए महत्वपूर्ण तिथियां और मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 जुलाई 2026, गुरुवार को रात्रि 10:20 बजे से
  • एकादशी तिथि समाप्त: 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को रात्रि 11:45 बजे तक
  • व्रत का दिन: 24 जुलाई 2026, शुक्रवार
  • पारण का समय (25 जुलाई 2026, शनिवार): सुबह 05:58 बजे से सुबह 08:35 बजे तक
  • द्वादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, शनिवार को रात्रि 12:50 बजे तक

ध्यान रहे, एकादशी का व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होकर अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक चलता है, और पारण द्वादशी तिथि में ही किया जाता है। व्रत के नियमों का पालन करते हुए ही शुभ मुहूर्त में पारण करें।

पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व (Importance of Putrada Ekadashi Vrat)

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अपना एक विशेष स्थान है, और पुत्रदा एकादशी का महत्व तो और भी अधिक है, विशेषकर उन दंपत्तियों के लिए जो संतानहीनता के दुख से गुजर रहे हैं। इस व्रत को करने से न केवल सांसारिक लाभ मिलते हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।

1. संतान प्राप्ति का आशीर्वाद

इस व्रत का सबसे प्रमुख और ज्ञात लाभ संतान प्राप्ति है। पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में इसका स्पष्ट वर्णन है कि सच्ची श्रद्धा और पूर्ण विधि-विधान से इस व्रत को करने वाले दंपत्ति को भगवान विष्णु की कृपा से पुत्र-रत्न की प्राप्ति होती है। यह संतान यशस्वी, गुणवान और दीर्घायु होती है। यह केवल पुत्र के लिए नहीं, बल्कि एक नेक, स्वस्थ और संस्कारी संतान के लिए किया जाता है।

2. पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति

अन्य एकादशी व्रतों की तरह, पुत्रदा एकादशी का व्रत भी सभी प्रकार के पापों का नाश करने वाला माना जाता है। व्यक्ति के ज्ञात और अज्ञात पापों का शमन होता है, और उसे मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने का अवसर मिलता है। यह व्रत व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।

3. सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य

इस व्रत के प्रभाव से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। आर्थिक कष्ट दूर होते हैं और परिवार में शांति व सद्भाव बना रहता है। भगवान विष्णु की कृपा से भक्तों के सभी भौतिक सुखों की पूर्ति होती है।

4. शारीरिक और मानसिक शुद्धि

एकादशी व्रत एक प्रकार का उपवास है, जो न केवल शरीर को शुद्ध करता है बल्कि मन को भी शांत और एकाग्र बनाता है। यह आत्म-अनुशासन को बढ़ावा देता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। उपवास के दौरान आत्म-चिंतन और भगवान के स्मरण से मानसिक शांति मिलती है।

5. वंश वृद्धि और पितरों का तर्पण

संतान की प्राप्ति से वंश की वृद्धि होती है, जो पितरों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। संतान होने से पितरों को मोक्ष मिलता है और उन्हें शांति प्राप्त होती है। इस प्रकार, पुत्रदा एकादशी का व्रत पितरों को भी प्रसन्न करता है।

कुल मिलाकर, पुत्रदा एकादशी व्रत एक अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी व्रत है, जिसे सच्ची निष्ठा से करने पर भगवान विष्णु अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, विशेषकर संतान संबंधी इच्छाओं को।

पुत्रदा एकादशी व्रत की विस्तृत पूजा विधि (Detailed Puja Method of Putrada Ekadashi Vrat)

पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा विधि अत्यंत सरल है, परंतु इसमें श्रद्धा और नियमों का पालन महत्वपूर्ण है। एकादशी पूजा विधि के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

1. व्रत के नियम और तैयारी (दशमी तिथि को)

  • एक दिन पहले की तैयारी: दशमी तिथि (23 जुलाई 2026) को ही व्रत की तैयारी शुरू कर दें। इस दिन सात्विक भोजन करें, जिसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग न हो। ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • पूजा सामग्री संग्रह: भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र, गंगाजल, तुलसी के पत्ते, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), पीले फूल, पीला चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई, मेवा), अक्षत (चावल), वस्त्र (पीले रंग के), मौली (कलावा), सुपारी, लौंग, इलायची, दक्षिणा, कपूर, आरती के लिए सामग्री, विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा की पुस्तक।
  • मानसिक और शारीरिक शुद्धि: दशमी की शाम को स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। मन में व्रत का संकल्प लें और किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से बचें।

2. एकादशी के दिन की पूजा (24 जुलाई 2026 को)

  • सुबह का स्नान और संकल्प:
    • एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में (सूर्य उदय से पहले) उठें।
    • शौच आदि से निवृत्त होकर पवित्र नदियों या घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें।
    • स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
    • पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल से पवित्र करें।
    • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
    • हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर "हे भगवान विष्णु, मैं (अपना नाम) पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति की कामना के साथ रख रहा/रही हूँ। आप मेरी यह मनोकामना पूर्ण करें और मुझे इस व्रत को निर्विघ्न संपन्न करने की शक्ति प्रदान करें।" ऐसा संकल्प लें।
  • षोडशोपचार पूजा (सोलह उपचारों से पूजा):
    • ध्यान: भगवान विष्णु का ध्यान करें।
    • आवाहन: भगवान विष्णु का आह्वान करें।
    • आसन: उन्हें आसन ग्रहण कराएं।
    • पाद्य: पैरों को धोने के लिए जल अर्पित करें।
    • अर्घ्य: हाथ धोने के लिए जल अर्पित करें।
    • आचमन: आचमन के लिए जल अर्पित करें।
    • स्नान: पंचामृत से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    • वस्त्र: पीले वस्त्र या मौली (कलावा) के रूप में वस्त्र अर्पित करें।
    • यज्ञोपवीत: जनेऊ अर्पित करें (यदि मूर्ति पर हो)।
    • गंध: पीला चंदन या रोली लगाएं।
    • पुष्प: पीले पुष्प, विशेषकर गेंदे के फूल या चंपा के फूल अर्पित करें। तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
    • धूप: धूप जलाएं।
    • दीप: घी का दीपक जलाएं।
    • नैवेद्य: फल, मिठाई, मेवा, खीर या अन्य सात्विक भोग अर्पित करें। ध्यान रहे, इसमें चावल का प्रयोग न हो।
    • तांबूल: पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, इलायची अर्पित करें।
    • दक्षिणा: सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा अर्पित करें।
  • मंत्र जाप और पाठ:
    • पूजा के दौरान और दिन भर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते रहें।
    • विष्णु सहस्रनाम, श्रीहरि स्तोत्र या गीता का पाठ करें।
    • पुत्रदा एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • विशेष प्रार्थना (संतान प्राप्ति हेतु):
    • पूजा के अंत में, संतान प्राप्ति की अपनी मनोकामना को लेकर भगवान विष्णु से अत्यंत विनम्रता और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।
    • हाथ जोड़कर भगवान से आशीर्वाद मांगे।
  • आरती: भगवान विष्णु की आरती करें।
  • प्रदक्षिणा और क्षमा प्रार्थना: आरती के बाद भगवान की प्रदक्षिणा करें (तीन या सात बार) और पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें।
  • रात्रि जागरण: संभव हो तो रात्रि जागरण करें और भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करें। इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

3. व्रत के दौरान सावधानियां (Precautions during the Vrat)

  • अन्न का त्याग: एकादशी के दिन अन्न का सेवन पूर्णतः वर्जित है। फलाहार कर सकते हैं (फल, दूध, मेवे, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा)।
  • क्रोध और लोभ से बचें: मन को शांत रखें। किसी पर क्रोध न करें, असत्य न बोलें, लोभ या मोह से दूर रहें।
  • ब्रह्मचर्य: इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।
  • तुलसी का सेवन: तुलसी का सेवन कर सकते हैं, लेकिन तुलसी के पत्ते एकादशी के दिन नहीं तोड़ने चाहिए। एक दिन पहले तोड़ कर रख लें।
  • सात्विकता: मन, वचन और कर्म से सात्विकता बनाए रखें।

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (The Story of Putrada Ekadashi Vrat)

पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व इसकी पौराणिक कथा में निहित है, जो बताती है कि कैसे इस व्रत को करने से संतानहीन दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ति हुई। यह कथा एक राजा और रानी की है, जिन्होंने इस व्रत के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की।

प्राचीन काल में महिष्मती नामक नगर में एक राजा राज्य करते थे, जिनका नाम सुकेतुमान था। उनकी पत्नी का नाम चम्पा था। राजा सुकेतुमान के पास धन-संपत्ति, ऐश्वर्य, बल, यश, सब कुछ था, लेकिन वे संतानहीन थे। इस कारण राजा और रानी दोनों अत्यंत दुखी रहते थे। उन्हें इस बात का भय सताता था कि उनके बाद उनके वंश को आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं होगा, और उनके पितरों को मुक्ति कैसे मिलेगी।

राजा सुकेतुमान का मन अपने राज्य के कार्यभार में भी नहीं लगता था। वे हमेशा इसी चिंता में डूबे रहते थे। एक दिन वे घोड़े पर सवार होकर वन में निकल पड़े। वन में घूमते-घूमते उन्हें एक बहुत ही सुंदर सरोवर दिखाई दिया, जिसके किनारे कई आश्रम बने हुए थे। उन आश्रमों में ऋषि-मुनि तपस्या कर रहे थे। राजा ने अपने घोड़े को रोका और ऋषि-मुनियों के पास गए। उन्होंने सभी ऋषियों को प्रणाम किया और उनसे अपनी समस्या बताई।

राजा की व्यथा सुनकर ऋषियों ने बताया, "हे राजन! आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी है। इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है। आप और आपकी पत्नी, दोनों विधि-विधान से इस व्रत को करें, तो निश्चित ही आपको पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी।"

ऋषियों के वचन सुनकर राजा सुकेतुमान अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने ऋषियों को धन्यवाद दिया और नगर वापस लौट आए। राजा ने अपनी पत्नी चम्पा को यह सारी बात बताई। राजा और रानी दोनों ने मिलकर पुत्रदा एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान और सच्ची श्रद्धा के साथ किया। उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की, व्रत कथा सुनी और रात्रि जागरण भी किया।

इस व्रत के पुण्य प्रभाव से और भगवान विष्णु की कृपा से रानी चम्पा गर्भवती हुईं और नौ महीने बाद उन्हें एक तेजस्वी पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। पुत्र के जन्म से राजा और रानी का दुख दूर हो गया और पूरे राज्य में खुशी का माहौल छा गया। उनका पुत्र बड़ा होकर एक यशस्वी और धर्मात्मा राजा बना।

इस प्रकार, पुत्रदा एकादशी का व्रत संतानहीन दंपत्तियों के लिए वरदान स्वरूप है। जो भी दंपत्ति इस व्रत को सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा से संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है।

संतान प्राप्ति के लिए विशेष उपाय और प्रार्थना (Special Measures and Prayers for Progeny)

पुत्रदा एकादशी का व्रत स्वयं में ही संतान प्राप्ति का एक अचूक उपाय है। हालांकि, कुछ विशेष क्रियाएं और प्रार्थनाएं इस व्रत के फल को और भी अधिक बढ़ा सकती हैं, जिससे भगवान विष्णु की कृपा शीघ्र प्राप्त हो:

  • तुलसी पूजा और सेवन: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। एकादशी के दिन तुलसी के पौधे की विधिवत पूजा करें (पत्ते न तोड़ें)। पूजा के बाद तुलसी की मिट्टी को माथे पर लगाएं। व्रत के पारण के दिन तुलसी दल का सेवन करें।
  • पीले वस्त्र और वस्तुएं दान: भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। एकादशी के दिन पूजा में पीले वस्त्र धारण करें। साथ ही, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को पीले वस्त्र, पीले फल, पीली मिठाई, चने की दाल (बेसन), हल्दी आदि का दान करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है।
  • गाय को चारा खिलाना: गौ सेवा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। एकादशी के दिन गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाएं। यह भी संतान प्राप्ति में सहायक माना जाता है।
  • पीपल के पेड़ की पूजा: कुछ मान्यताओं के अनुसार, पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और दीपक प्रज्ज्वलित करें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ: यदि संभव हो तो पूजा के समय या दिन में कई बार विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। यह भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली स्तोत्र है।
  • दंपत्ति मिलकर करें व्रत: यदि पति और पत्नी दोनों मिलकर यह व्रत करते हैं, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। दोनों की श्रद्धा और संकल्प मिलकर भगवान की कृपा को आकर्षित करते हैं।
  • सच्ची और हृदय से प्रार्थना: पूजा के अंत में, अपनी संतान प्राप्ति की तीव्र इच्छा को भगवान विष्णु के सामने पूरी तरह से व्यक्त करें। कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि अपने हृदय से प्रार्थना करें। अपनी इच्छा को स्पष्ट रूप से मांगें और विश्वास रखें कि भगवान आपकी सुनेंगे।
  • अखंड दीपक: यदि संभव हो तो एकादशी के दिन भगवान विष्णु के सामने घी का अखंड दीपक जलाएं, जो पूरी रात प्रज्ज्वलित रहे। यह आपकी भक्ति और एकाग्रता को दर्शाता है।

याद रखें, इन सभी उपायों के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण है आपकी अटूट श्रद्धा और विश्वास। जब आप पूरी तरह से भगवान विष्णु पर विश्वास करके यह व्रत करते हैं, तो वे अवश्य आपकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण विधि (Method for Breaking the Putrada Ekadashi Vrat)

एकादशी व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) द्वादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए, अन्यथा व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। 24 जुलाई 2026 एकादशी के लिए पारण 25 जुलाई 2026, शनिवार को किया जाएगा।

पारण विधि के चरण:

  • सुबह का स्नान और पूजा: द्वादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु का स्मरण: भगवान विष्णु का स्मरण करें और उनकी संक्षिप्त पूजा करें। दीपक जलाएं, फूल चढ़ाएं और उनका आशीर्वाद लें।
  • ब्राह्मणों को भोजन और दान: यदि संभव हो तो किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं। उन्हें दक्षिणा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें। दान में अनाज, वस्त्र और फल शामिल हो सकते हैं।
  • पारण भोजन: पारण के शुभ मुहूर्त में, सबसे पहले तुलसी दल ग्रहण करें। इसके बाद, सात्विक भोजन से अपना व्रत खोलें। ध्यान रहे कि भोजन में चावल का सेवन अवश्य करें, क्योंकि चावल को भगवान विष्णु का प्रसाद माना जाता है और एकादशी के दिन चावल का त्याग किया जाता है।
  • सात्विक भोजन: पारण के भोजन में अन्न, दालें, सब्जियां आदि शामिल करें। लहसुन-प्याज रहित और तेल-मसाले रहित सादा भोजन करें।
  • नियमों का पालन: पारण करते समय इस बात का ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण कर लिया जाए।

द्वादशी तिथि में पारण करने के बाद ही आपका पुत्रदा एकादशी व्रत पूर्ण माना जाएगा और आपको इसका संपूर्ण फल प्राप्त होगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों के लिए एक अनमोल वरदान है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सच्चा मार्ग है। 24 जुलाई 2026 को पड़ने वाली यह एकादशी उन सभी भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो अपने जीवन में संतान सुख की कामना करते हैं और अपने वंश को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

सच्ची श्रद्धा, पूर्ण समर्पण और विधि-विधान से किए गए इस व्रत के प्रभाव से न केवल संतान की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत हमें आत्म-अनुशासन, धैर्य और ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना सिखाता है।

यदि आप भी संतान सुख से वंचित हैं, तो बिना किसी संशय के 24 जुलाई 2026 पुत्रदा एकादशी का व्रत अवश्य करें। भगवान विष्णु की असीम कृपा आप पर अवश्य बरसेगी और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। धैर्य रखें, विश्वास रखें और पूर्ण भक्ति के साथ भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना करें। आपको निश्चित रूप से संतान का वरदान प्राप्त होगा।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: What is Putrada Ekadashi?

Putrada Ekadashi is a highly significant and sacred fast in Sanatan Dharma, dedicated to Lord Vishnu, particularly known for bestowing blessings of children.

Q: When is Putrada Ekadashi in 2026?

In the year 2026, Shravan Putrada Ekadashi falls on Friday, July 24th.

Q: Who is Putrada Ekadashi dedicated to?

Putrada Ekadashi is dedicated to Lord Vishnu.

Q: What is the primary benefit of observing Putrada Ekadashi?

The primary benefit is receiving the blessing of children, especially for couples longing for a healthy and virtuous child.

Q: What does the name 'Putrada Ekadashi' mean?

The name 'Putrada Ekadashi' literally means 'Ekadashi that grants children' or 'son-giving Ekadashi'.

Q: How many Putrada Ekadashis occur in a year?

According to the Hindu calendar, there are two Putrada Ekadashis in a year: one in the Shukla Paksha of Paush month and another in the Shukla Paksha of Shravan month.

Q: Why is the Shravan Putrada Ekadashi considered particularly important?

Shravan Putrada Ekadashi is especially significant because it falls during Chaturmas, when Lord Vishnu is in Yog Nidra, amplifying the merits of worship.

Q: What other benefits does observing Putrada Ekadashi bring?

Besides progeny, observing this fast fulfills all desires, destroys sins, and brings happiness and prosperity into one's life.

Q: When does Ekadashi Tithi begin for July 24, 2026?

For July 24, 2026, the Ekadashi Tithi begins on Thursday, July 23, 2026, at 10:20 PM.

Q: When does Ekadashi Tithi end for July 24, 2026?

For July 24, 2026, the Ekadashi Tithi ends on Friday, July 24, 2026, at 11:45 PM.

Q: What is the auspicious day for observing the Putrada Ekadashi fast in 2026?

The auspicious day for observing the Putrada Ekadashi fast in 2026 is Friday, July 24, 2026.

Q: What is the 'Paran' (breaking the fast) time for Putrada Ekadashi in 2026?

The 'Paran' time for Putrada Ekadashi in 2026 is from 05:58 AM to 08:35 AM on Saturday, July 25, 2026.

Q: How long does an Ekadashi fast typically last?

An Ekadashi fast typically begins at sunrise on the Ekadashi day and concludes at sunrise on the next day, which is Dwadashi.

Q: Is Putrada Ekadashi solely for wishing for a son?

No, it is observed not only for a son but for a good, cultured, and successful child (सुयोग्य संतान) in general.

Q: What is the broader importance of Putrada Ekadashi Vrat?

The Putrada Ekadashi Vrat holds immense spiritual importance, offering not only worldly benefits like progeny but also leading to spiritual advancement.

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प्रार्थना संपादकीय टीम

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