माता रानी को करना है प्रसन्न? नवरात्रि में जरूर करें इन 9 शक्तिशाली मंत्रों का जाप
- द्वारा प्रार्थना संपादकीय टीम
- प्रकाशित: October 13, 2026
- अंतिम अपडेट: October 13, 2026
- 8 Mins

शक्ति की उपासना का महापर्व नवरात्रि सनातन संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। यह वह समय होता है जब जगत जननी मां दुर्गा अपने नौ अलग-अलग स्वरूपों में पृथ्वी लोक पर आती हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। साल 2026 में आने वाले इस पावन पर्व को लेकर भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह है। यदि आप भी इस वर्ष माता रानी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो विधि-विधान से पूजा के साथ-साथ मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस लेख में हम आपको नवरात्रि मंत्र 2026 के विशेष संदर्भ में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित 9 शक्तिशाली मंत्र, उनके जाप की विधि और नियमों के बारे में विस्तार से बताएंगे। इन मंत्रों के नियमित जाप से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है.
नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व और मंत्र जाप की शक्ति
नवरात्रि का अर्थ है 'नौ रातें'। यह अवधि केवल बाहरी उत्सव की नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने की होती है। मंत्रों में अद्भुत कंपन और ऊर्जा होती है जो हमारे आसपास के नकारात्मक वातावरण को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। माता रानी के मंत्र इतने शक्तिशाली होते हैं कि इनके सच्चे मन से उच्चारण मात्र से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
जब आप नवरात्रि में जाप करने वाले मंत्र का सही उच्चारण और विधि के साथ प्रयोग करते हैं, तो देवी दुर्गा अतिशीघ्र प्रसन्न होती हैं। आइए जानते हैं मां के नौ रूपों के अनुसार उनके विशेष नवरात्रि पूजा मंत्र।
माता रानी के 9 दिनों के 9 शक्तिशाली मंत्र
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां के एक विशिष्ट रूप की पूजा की जाती है। यदि आप प्रतिदिन उस देवी के विशेष मंत्र का 108 बार (एक माला) जाप करें, तो आपको अष्टसिद्धियों की प्राप्ति हो सकती है।
पहला दिन: मां शैलपुत्री मंत्र (साहस और स्थिरता के लिए)
पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री नवरात्रि के प्रथम दिन पूजी जाती हैं। ये स्थिरता, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। इनके पूजन से मूलाधार चक्र जागृत होता है।
- मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
- ध्यान मंत्र: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढं शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी मंत्र (ज्ञान और तपस्या के लिए)
ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप की चारिणी यानी तपस्या करने वाली। मां का यह स्वरूप भक्तों को संयम, वैराग्य और नैतिकता की शिक्षा देता है। छात्रों और ज्ञान के साधकों के लिए यह मंत्र अत्यंत फलदायी है।
- मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
- ध्यान मंत्र: दधाना कर पद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमार्॥
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा मंत्र (शांति और पराक्रम के लिए)
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। इनके स्वर से नकारात्मक शक्तियां भयभीत होकर भाग जाती हैं। यह अपने भक्तों को वीरता और निर्भीकता प्रदान करती हैं।
- मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥
- ध्यान मंत्र: पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोस्त्रकैर्युता। प्रसाद तनु मह्यं चन्द्रघंटेति विश्रुता॥
चौथा दिन: मां कूष्मांड्या मंत्र (स्वास्थ्य और सृजन के लिए)
जिन्होंने अपनी मंद हंसी से ब्रह्मांड की रचना की, वे मां कूष्मांड्या हैं। इन्हें इस संसार का आदि-स्वरूप माना जाता है। इनके मंत्र के जाप से आरोग्यता और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
- मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
- ध्यान मंत्र: सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता मंत्र (मोक्ष और संतान सुख के लिए)
भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इनकी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान हैं। इनकी उपासना से संतान सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमात्रै नमः॥
- ध्यान मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
छठवां दिन: मां कात्यायनी मंत्र (विवाह बाधा और शत्रुओं पर विजय के लिए)
महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था। विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मां कात्यायनी की पूजा अचूक मानी जाती है।
- मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
- ध्यान मंत्र: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्गूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
सातवां दिन: मां कालरात्रि मंत्र (भय मुक्ति और संकट नाश के लिए)
मां दुर्गा का यह सबसे भयंकर रूप है, जो दुष्टों का नाश और भक्तों के सभी प्रकार के भयों (भूत-प्रेत, अकाल मृत्यु आदि) को दूर करता है। यह शत्रु नाश के लिए सर्वोपरि मानी गई हैं।
- मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
- ध्यान मंत्र: एकवापा जपाकर्णपूरा नग्न खरास्थिता। लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
आठवां दिन: मां महागौरी मंत्र (शुद्धि और सौंदर्य के लिए)
अष्टमी तिथि पर महागौरी की पूजा का विधान है। इनका वर्ण अत्यंत गौर (श्वेत) है। यह भक्तों के समस्त पापों को धोकर उन्हें पवित्र और निर्मल बनाती हैं।
- मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
- ध्यान मंत्र: श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुक्री। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रसादिकायै॥
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री मंत्र (समस्त सिद्धियों और मोक्ष के लिए)
नवरात्रि का अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। यह अपने भक्तों को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व—इन आठ सिद्धियों को प्रदान करती हैं।
- मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
- ध्यान मंत्र: सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
सर्वविदित एवं महाशक्तिशाली देवी दुर्गा मंत्र
ऊपर बताए गए नौ रूपों के मंत्रों के अलावा, यदि आप संपूर्ण नवरात्रि में एक ऐसा महामंत्र जपना चाहें जो सभी देवियों की ऊर्जा को समाहित करता हो, तो दुर्गा सप्तशती का यह मूल मंत्र सबसे प्रभावी है:
"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"
यह देवी दुर्गा मंत्र आपके जीवन के हर मंगल कार्य को सिद्ध करने की क्षमता रखता है। नवरात्रि के नौ दिनों में इस मंत्र की कम से कम एक या तीन माला का जाप अवश्य करना चाहिए।
मंत्र जाप के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण नियम
किसी भी अनुष्ठान की सफलता उसके नियमों के पालन पर निर्भर करती है। नवरात्रि पूजा मंत्र का जाप करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:
- पवित्रता: मंत्र जाप शुरू करने से पहले स्नान कर लें और स्वच्छ (धुले हुए) वस्त्र धारण करें। लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना माता रानी को अतिप्रिय है।
- आसन: हमेशा कुश, ऊन या कंबल के आसन पर बैठकर ही मंत्र जाप करें। नग्न भूमि पर बैठकर जाप न करें।
- माला का चयन: माता रानी के मंत्रों के जाप के लिए रुद्राक्ष की माला या स्फटिक की माला का प्रयोग सबसे उत्तम माना जाता है।
- उच्चारण की शुद्धता: मंत्रों का उच्चारण स्पष्ट और सही होना चाहिए। यदि आप संस्कृत के श्लोक या मंत्र बोलने में असमर्थ हैं, तो मन ही मन एकाग्रचित्त होकर उनका स्मरण कर सकते हैं।
- दिशा: मंत्र जाप करते समय आपका मुख पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- दीपक: जाप शुरू करने से पहले माता के समक्ष शुद्ध घी का अखंड दीपक या सामान्य दीपक प्रज्वलित करें और धूप-धूप दिखाएं।
नवरात्रि मंत्र जाप के चमत्कारी लाभ
नियमित और सच्चे भाव से किए गए मंत्र जाप से भक्तों को अनगिनत लाभ प्राप्त होते हैं:
- मानसिक शांति: मन का भटकाव कम होता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश: घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होकर सकारात्मकता का वास होता है।
- समस्याओं का समाधान: करियर, व्यापार, स्वास्थ्य या वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
- माता की विशेष कृपा: साधक को मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उसे जीवन में कभी भी किसी चीज का अभाव नहीं रहता।
निष्कर्ष
आने वाला नवरात्रि 2026 का पर्व आपके जीवन में नई ऊर्जा, उमंग और खुशियां लेकर आए, इसके लिए मां दुर्गा की आराधना पूरी श्रद्धा के साथ करें। ऊपर बताए गए 9 शक्तिशाली मंत्रों का सच्चे हृदय से जाप करके आप माता रानी को आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं। याद रखें, ईश्वर को महंगे उपहारों से ज्यादा आपकी सच्ची भक्ति और पवित्र भाव पसंद आते हैं। इस नवरात्रि संकल्प लें कि आप नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करेंगे और अपने जीवन को धन्य बनाएंगे।
जय माता दी!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: नवरात्रि का क्या आध्यात्मिक महत्व है?
नवरात्रि का अर्थ 'नौ रातें' है। यह अवधि आत्म-शुद्धि और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने की होती है, जिसमें मंत्रों के जाप से नकारात्मक वातावरण समाप्त होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
Q: वर्ष 2026 की नवरात्रि में माता रानी को कैसे प्रसन्न किया जा सकता है?
वर्ष 2026 की नवरात्रि में विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित शक्तिशाली मंत्रों का जाप करने से माता रानी अतिशीघ्र प्रसन्न होती हैं।
Q: मंत्रों का जाप कितनी बार करना चाहिए?
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां के विशिष्ट रूप के मंत्र का 108 बार यानी एक माला जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
Q: नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा की जाती है और उनका मंत्र क्या है?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इनका मंत्र 'ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥' है।
Q: मां शैलपुत्री के पूजन से क्या लाभ मिलता है?
मां शैलपुत्री स्थिरता, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। इनके पूजन से साहस और स्थिरता प्राप्त होती है तथा मूलाधार चक्र जागृत होता है।
Q: दूसरा दिन किस देवी को समर्पित है और उनका मंत्र क्या है?
दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। इनका मंत्र 'ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥' है।
Q: मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र किसके लिए अत्यंत फलदायी है?
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र छात्रों और ज्ञान के साधकों के लिए अत्यंत फलदायी है क्योंकि यह संयम, वैराग्य और नैतिकता की शिक्षा देता है।
Q: तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है और उनका मंत्र क्या है?
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इनका मंत्र 'ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥' है।
Q: मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को क्या प्राप्त होता है?
मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को वीरता, निर्भीकता, शांति और पराक्रम प्रदान करती हैं। इनके स्वर से नकारात्मक शक्तियां भयभीत होकर भाग जाती हैं।
Q: चौथे दिन पूजी जाने वाली मां कूष्मांड्या का मंत्र क्या है?
चौथे दिन पूजी जाने वाली मां कूष्मांड्या का मंत्र 'ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥' है, जिसके जाप से आरोग्यता और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
प्रार्थना संपादकीय टीम
प्रार्थना संपादकीय टीम आपकी आध्यात्मिक यात्रा का समर्थन करने के लिए दैनिक आध्यात्मिक मार्गदर्शन, प्रामाणिक अनुष्ठान और प्राचीन सनातन शास्त्रों से गहरे अंतर्दृष्टि साझा करती है।
ताजा समाचार
दैनिक समाचार पत्र
ट्रैक रखने के लिए ब्लॉग से सभी शीर्ष कहानियां प्राप्त करें।










एक टिप्पणी छोड़ें