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नवरात्रि पूजा (एक दिवसीय)
नवरात्रि पूजा माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है। यह पूजा माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने, जीवन में सुख-समृद्धि, शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक की जाती है। एक दिवसीय नवरात्रि पूजा में माँ भगवती की आराधना, दुर्गा मंत्र जाप एवं विशेष पूजन किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ या दुर्गा मंत्र जाप, पुष्प अर्पण, दुर्गा आरती, हवन, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, माला, लाल पुष्प, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, फल, मिठाई, नारियल, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

नवरात्रि पूजा (9 दिन)
नवरात्रि पूजा माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है। यह पूजा नौ दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है, जिसमें प्रतिदिन माँ दुर्गा के एक स्वरूप की आराधना की जाती है। यह अनुष्ठान माँ भगवती की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में सुख-समृद्धि, शांति, साहस और आध्यात्मिक उन्नति की कामना हेतु किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा मंत्र जाप, पुष्प अर्पण, दुर्गा आरती, हवन, कन्या पूजन, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण नौ दिवसीय पूजा कराते हैं। सामग्री: माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, माला, लाल पुष्प, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, फल, मिठाई, जौ, मिट्टी का पात्र, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री, कन्या पूजन सामग्री एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

यज्ञ / शांति हवन
यज्ञ एवं शांति हवन एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें अग्नि देव के माध्यम से वैदिक मंत्रों के साथ आहुति अर्पित की जाती है। यह अनुष्ठान घर, परिवार और आसपास के वातावरण में शांति, सकारात्मकता, सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक कल्याण की कामना हेतु किया जाता है। शांति हवन विशेष रूप से मानसिक शांति, पारिवारिक मंगल और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक संपन्न किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नवग्रह पूजन, अग्नि स्थापना, वैदिक मंत्र जाप, हवन आहुति, पूर्णाहुति, शांति पाठ एवं आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण यज्ञ एवं हवन कराते हैं। सामग्री: हवन कुंड, आम की लकड़ी, समिधा, हवन सामग्री, घी, जौ, तिल, अक्षत, नवग्रह सामग्री, कपूर, चंदन, रोली, कुमकुम, फूल, माला, नारियल, पान, सुपारी, फल, मिठाई, कलश, आम के पत्ते, धूप, दीपक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: यज्ञ की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, यज्ञ के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

सत्यनारायण कथा
सत्यनारायण कथा भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप को समर्पित एक पारंपरिक हिंदू पूजा है। यह पूजा कृतज्ञता व्यक्त करने, दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने और शांति, समृद्धि तथा कल्याण की कामना हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, सत्यनारायण पूजा, कथा वाचन, प्रसाद वितरण, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, चंदन, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य और पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

नवग्रह शांति / हवन
नवग्रह शांति पूजा एवं हवन नौ ग्रह देवताओं की आराधना हेतु की जाती है। यह पूजा शांति, कल्याण और ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों से राहत हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नवग्रह पूजा, नवग्रह मंत्र जाप, ग्रह शांति अनुष्ठान, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: नवग्रह पूजा सामग्री, कलश, नारियल, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, विभिन्न अनाज, तिल, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

जन्मदिन पूजन / मार्कंडेय पूजन
जन्मदिन पूजन एवं मार्कण्डेय पूजन एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है, जो जन्मदिवस के शुभ अवसर पर दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना हेतु किया जाता है। यह पूजा भगवान गणेश, भगवान शिव, आयु के देवता एवं ऋषि मार्कण्डेय जी के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक संपन्न की जाती है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य जीवन में सकारात्मकता, आध्यात्मिक उन्नति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करना है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नवग्रह पूजन, आयुष मंत्र जाप, महामृत्युंजय मंत्र जाप, मार्कण्डेय ऋषि पूजन, जन्म नक्षत्र पूजन, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: भगवान शिव एवं गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, माला, बेलपत्र, दूर्वा, पान, सुपारी, फल, मिठाई, पंचामृत, घी, हवन सामग्री, जौ, तिल, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, जन्म नक्षत्र तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।


दुर्गा पूजा / दुर्गा सप्तशती पाठ
दुर्गा पूजा और दुर्गा सप्तशती पाठ माँ दुर्गा एवं उनके दिव्य स्वरूपों को समर्पित पवित्र अनुष्ठान हैं। यह पूजा माँ दुर्गा से शक्ति, रक्षा, सुख-शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना हेतु पारंपरिक रूप से की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ दुर्गा पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ, नवार्ण मंत्र जाप, हवन, पूर्णाहुति एवं माँ दुर्गा की आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पूर्ण पूजा संपन्न कराते हैं। सामग्री: माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, चंदन, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री, दुर्गा सप्तशती पुस्तक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: सटीक अवधि, मंत्र संख्या, पाठ, हवन विधि और सामग्री नवरात्रि, पारिवारिक परंपरा और पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

सुंदरकांड पाठ
सुंदरकांड पाठ रामचरितमानस का एक पवित्र पाठ है, जिसमें भगवान हनुमान जी की भक्ति, साहस, बुद्धिमत्ता और माता सीता की खोज में उनकी अद्भुत यात्रा का वर्णन मिलता है। यह पाठ भगवान हनुमान जी एवं प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में साहस, भक्ति, शांति और आध्यात्मिक शक्ति की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, सुंदरकांड पाठ, हनुमान मंत्र जाप, हनुमान आरती, श्रीराम आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पाठ एवं पूजा कराते हैं। सामग्री: रामचरितमानस / सुंदरकांड पुस्तक, भगवान हनुमान जी एवं श्रीराम जी की तस्वीर या मूर्ति, फूल, सिंदूर, चमेली का तेल, रोली, कुमकुम, अक्षत, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, फल, मिठाई, गुड़, धूप, कपूर, दीपक, घी एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पाठ की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि श्रद्धालुओं की संख्या, परिवार की परंपरा तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

सुंदरकांड पाठ (संगीतमय)
सुंदरकांड पाठ संगीत सहित रामचरितमानस का एक भक्तिमय एवं पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें भगवान हनुमान जी की भक्ति, साहस, बुद्धिमत्ता और माता सीता की खोज में उनकी अद्भुत यात्रा का वर्णन संगीतमय चौपाइयों एवं भजनों के माध्यम से किया जाता है। यह पाठ भगवान हनुमान जी एवं प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में सुख-शांति, साहस, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, संगीतमय सुंदरकांड पाठ, हनुमान मंत्र जाप, भजन-कीर्तन, हनुमान आरती, श्रीराम आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी एवं भजन मंडली पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पाठ एवं संगीतमय भक्ति कार्यक्रम संपन्न कराते हैं। सामग्री: रामचरितमानस / सुंदरकांड पुस्तक, भगवान हनुमान जी एवं श्रीराम जी की तस्वीर या मूर्ति, फूल, माला, सिंदूर, चमेली का तेल, रोली, कुमकुम, अक्षत, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, फल, मिठाई, गुड़, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, भजन एवं संगीत के लिए आवश्यक साउंड सिस्टम तथा अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पाठ की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि श्रद्धालुओं की संख्या, संगीत मंडली की व्यवस्था, परिवार की परंपरा तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

लक्ष्मी पूजा (दीपावली)
लक्ष्मी पूजा दीपावली पर देवी लक्ष्मी की आराधना हेतु की जाती है। यह पूजा धन, समृद्धि और सौभाग्य की कामना हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश-लक्ष्मी पूजा, कलश स्थापना, लक्ष्मी मंत्र जाप, श्री सूक्त पाठ, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: लक्ष्मी-गणेश मूर्ति, कलश, नारियल, कमल का फूल, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, चंदन, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

विश्वकर्मा पूजा
विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है, जिन्हें देवताओं का दिव्य शिल्पकार एवं वास्तुकार माना जाता है। यह पूजा विशेष रूप से कारखानों, कार्यशालाओं, दुकानों, कार्यालयों, निर्माण स्थलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में की जाती है। यह अनुष्ठान कार्य में सफलता, व्यापार में उन्नति, मशीनों एवं उपकरणों की सुरक्षा तथा सुख-समृद्धि की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, भगवान विश्वकर्मा का पूजन, औजार एवं मशीनों का पूजन, विश्वकर्मा मंत्र जाप, पुष्प अर्पण, आरती, हवन, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, माला, पान, सुपारी, फल, मिठाई, लाल या पीला वस्त्र, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री, औजार एवं मशीनों के पूजन हेतु आवश्यक सामग्री तथा अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि प्रतिष्ठान की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

गणेश चतुर्थी / गणेश पूजा
गणेश चतुर्थी / गणेश पूजा भगवान गणेश की आराधना हेतु की जाती है, जो विघ्नहर्ता तथा बुद्धि, समृद्धि और शुभ आरंभ के देवता हैं। पूजा विधि में संकल्प, गणेश स्थापना, षोडशोपचार पूजा, गणेश मंत्र जाप, मोदक अर्पण, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: गणेश मूर्ति, कलश, नारियल, दूर्वा घास, मोदक, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

सरस्वती पूजा
सरस्वती पूजा माँ सरस्वती को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है, जिन्हें ज्ञान, विद्या, बुद्धि, संगीत, कला और वाणी की देवी माना जाता है। यह पूजा विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों एवं ज्ञानार्जन करने वालों द्वारा माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त करने तथा शिक्षा, एकाग्रता, रचनात्मकता और बुद्धि के विकास की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ सरस्वती का पूजन, सरस्वती मंत्र जाप, पुस्तक एवं लेखनी पूजन, पुष्प अर्पण, सरस्वती वंदना, आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: माँ सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, पीले या सफेद फूल, माला, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी, पान, सुपारी, फल, मिठाई, पीले वस्त्र, पुस्तकें, कॉपी, कलम, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

तुलसी विवाह
तुलसी विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप एवं माता तुलसी को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है। यह पूजा देवउठनी एकादशी एवं कार्तिक मास में श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न की जाती है। तुलसी विवाह में माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया जाता है। यह अनुष्ठान परिवार में सुख-शांति, वैवाहिक मंगल, समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने हेतु किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माता तुलसी का पूजन, भगवान शालिग्राम का पूजन, विवाह मंडप सजावट, वरमाला, कन्यादान, मंगलाष्टक, विवाह मंत्र, आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विवाह विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण तुलसी विवाह संपन्न कराते हैं। सामग्री: माता तुलसी का पौधा, भगवान शालिग्राम या विष्णु जी की मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल चुनरी, पीले वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, माला, गन्ना, आंवला, पान, सुपारी, हल्दी, मेहंदी, फल, मिठाई, मखाना, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी एवं अन्य आवश्यक विवाह एवं पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, विवाह की रस्में, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, स्थानीय रीति-रिवाजों तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

अखंड रामायण पाठ
5 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 24 घंटे का निरंतर अखंड श्री रामचरितमानस पाठ।

करवा चौथ पूजा
अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ व्रत कथा एवं पूजन।

गणपति अथर्वशीर्ष पाठ
3 वैदिक आचार्यों द्वारा श्री गणपति अथर्वशीर्ष के आवर्तन एवं विशेष हवन।

विष्णु सहस्रनाम पाठ
भगवान विष्णु के 1000 पवित्र नामों का पाठ, जिससे मानसिक शांति और सर्व कार्य सिद्धि होती है।


भूमि पूजन
भूमि पूजन नए घर, कार्यालय या अन्य संपत्ति के निर्माण से पूर्व किया जाता है। यह गणेश जी, भूमि देवी और वास्तु पुरुष का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु की जाती है। पूजा विधि में गणेश पूजा, संकल्प, भूमि देवी पूजा, वास्तु पूजा, कलश स्थापना, नवग्रह पूजा एवं हवन सम्मिलित है। सामग्री: नारियल, कलश, आम के पत्ते, रोली, मोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, दीपक एवं अन्य सामग्री।

वट सावित्री पूजा
वट वृक्ष की पूजा एवं सत्यवान-सावित्री कथा, जो सौभाग्य और सुखद दांपत्य जीवन प्रदान करती है।

गृह प्रवेश पूजा
गृह प्रवेश पूजा नए घर में प्रवेश से पूर्व शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना हेतु की जाती है। पूजा विधि में गणेश पूजा, संकल्प, कलश स्थापना, वास्तु पूजा, नवग्रह पूजा, गृह शांति पूजा, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, मोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, दीपक एवं अन्य सामग्री।

घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
घर के मंदिर में देव मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा और वैदिक अभिषेक का पावन अनुष्ठान।

सगाई पूजा (वाग्दान)
वर और वधू के उज्ज्वल भविष्य और मंगलमय जीवन के लिए वैदिक सगाई व वाग्दान पूजन।

नामकरण संस्कार पूजा
नवजात शिशु के नक्षत्र और राशि के अनुसार वैदिक रीति से नामकरण संस्कार पूजन।

अन्नप्राशन संस्कार
शिशु को प्रथम बार अन्न ग्रहण कराने का पवित्र अन्नप्राशन संस्कार।

मुंडन संस्कार पूजा
शिशु के प्रथम मुंडन पर केश समर्पण और बुद्धि-आयु की वृद्धि के लिए वैदिक पूजन।

विद्यारंभ संस्कार
शिशु की शिक्षा और ज्ञानार्जन की शुभ शुरुआत के लिए विद्यारंभ संस्कार।

कर्णवेध संस्कार
शिशु के शारीरिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और धार्मिक शुद्धि के लिए कर्णवेध संस्कार।

यज्ञोपवीत संस्कार (जनेऊ)
वैदिक रीति से जनेऊ धारण और गायत्री दीक्षा का दो दिवसीय पवित्र यज्ञोपवीत संस्कार।

कुंभ विवाह / अर्क विवाह
मांगलिक दोष और विवाह बाधा निवारण के लिए कुंभ अथवा अर्क वृक्ष से विवाह अनुष्ठान।


हल्दी समारोह
विवाह पूर्व वर-वधू को हल्दी लगाने का पारंपरिक और मांगलिक उत्सव।

विवाह संस्कार
सप्तपदी, कन्यादान और पाणिग्रहण सहित संपूर्ण वैदिक विवाह संस्कार।

अंत्येष्टि संस्कार / पिंड दान
स्वर्गवासी आत्मा की सद्गति और मोक्ष प्राप्ति के लिए 12 दिवसीय विधिपूर्वक पिंडदान एवं श्राद्ध।

पितृ दोष निवारण पूजा
पितृ दोष निवारण पूजा पूर्वजों का सम्मान करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, पितृ देवता पूजा, तर्पण, नवग्रह पूजा, मंत्र जाप, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: कलश, नारियल, दर्भ/कुश घास, काले तिल, जौ, चावल, फूल, फल, दूध, घी, पान, सुपारी, रोली, कुमकुम, अक्षत, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, हवन सामग्री एवं अन्य सामग्री।

गायत्री पूजा
गायत्री पूजा माँ गायत्री को समर्पित एक पवित्र वैदिक आराधना है। यह पूजा शांति, पवित्रता, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ गायत्री पूजा, गायत्री मंत्र जाप, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: कलश, नारियल, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, चंदन, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

मूल शांति पूजा
गंडमूल नक्षत्रों में जन्मे बालकों के दोष निवारण के लिए 27 वृक्षों के पत्तों व जल से मूल शांति पूजन।

महामृत्युंजय जाप
असाध्य रोगों से मुक्ति, अकाल मृत्यु भय निवारण और दीर्घायु के लिए सवा लाख महामृत्युंजय जाप।

वास्तु शांति पूजा
भवन और व्यापारिक स्थल के वास्तु दोषों के निवारण हेतु 3 पंडितों द्वारा वास्तु शांति यज्ञ।

काल सर्प दोष पूजा
काल सर्प दोष पूजा जन्म कुंडली में काल सर्प योग होने पर की जाती है। यह भगवान शिव, नाग देवता और नवग्रहों की पूजा के साथ शांति और कल्याण हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नाग देवता पूजा, शिव पूजा, नवग्रह पूजा, काल सर्प मंत्र जाप, अभिषेक, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: शिवलिंग, नाग देवता सामग्री, कलश, नारियल, दूध, गंगाजल, बिल्व पत्र, फूल, रोली, कुमकुम, अक्षत, काले तिल, जौ, फल, मिठाई, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

लक्ष्मी जाप
स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति और धन-धान्य की वृद्धि के लिए 7 दिनों का विशेष महालक्ष्मी मंत्र जाप।

गणपति यज्ञ / षष्ठार्चन
विघ्नहर्ता श्री गणेश के निमित्त षष्ठार्चन एवं महायज्ञ, जो सभी कार्यों को निर्विघ्न संपन्न करता है।

शिव यज्ञ / षष्ठार्चन
देवाधिदेव महादेव की प्रसन्नता और कृपा प्राप्ति के लिए विशेष शिव यज्ञ व षष्ठार्चन।


लक्ष्मी यज्ञ / षष्ठार्चन
आर्थिक संकटों के निवारण और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी षष्ठार्चन एवं हवन।

विष्णु यज्ञ / षष्ठार्चन
जगतपालक भगवान श्री हरि विष्णु का षष्ठार्चन एवं यज्ञ, जिससे घर-परिवार में प्रेम और शांति बनी रहती है।

दुर्गा यज्ञ / षष्ठार्चन
शत्रु बाधा निवारण, आत्मबल और सुरक्षा के लिए भगवती दुर्गा का षष्ठार्चन एवं यज्ञ।

नवचंडी पाठ
9 दिनों तक श्री दुर्गा सप्तशती का 9 बार नवाह पाठ एवं नवचंडी यज्ञ।

शतचंडी पाठ
7 वरिष्ठ आचार्यों द्वारा 5 दिनों में 100 चंडी पाठ एवं भव्य शतचंडी महायज्ञ।

एकादशी उद्यापन
वर्ष भर के एकादशी व्रतों की पूर्णता पर विधिपूर्वक उद्यापन, हवन एवं ब्राह्मण भोज।

प्रदोष उद्यापन
भगवान शिव और माता पार्वती के निमित्त किए गए प्रदोष व्रतों का विधिवत उद्यापन।

सप्तवार उद्यापन
सप्ताह के वारों (सोमवार, गुरुवार, शनिवार आदि) के व्रतों की पूर्णता पर उद्यापन पूजन।

पूर्णिमा उद्यापन
पूर्णिमा व्रत की पूर्णता पर श्री सत्यनारायण पूजन, कथा एवं विधिवत उद्यापन।

नवरात्रि पूजा (मानक पैकेज)
नवरात्रि पूजा मानक पैकेज - घटस्थापना एवं दैनिक पूजन व्यवस्था।

नवरात्रि पूजा (विस्तारित पैकेज)
नवरात्रि पूजा विस्तारित पैकेज - 9 दिनों का संपूर्ण सप्तशती पाठ, कन्या पूजन एवं पूर्णाहुति हवन।

घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा (मानक पैकेज)
घर के मंदिर के लिए मानक 1 दिवसीय मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान।


घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा (विस्तारित पैकेज)
विस्तारित प्राण प्रतिष्ठा पैकेज - न्यास, षोडशोपचार, जलाधिवास एवं हवन सहित।

रुद्राभिषेक - 3 पंडित
3 वैदिक पंडितों द्वारा विशेष रुद्राभिषेक पैकेज।

रुद्राभिषेक - 5 पंडित
5 ब्राह्मणों द्वारा शुक्ल यजुर्वेदीय मंत्रोच्चार सहित महा रुद्राभिषेक।

रुद्राभिषेक + नमक चमक पाठ - 11 पंडित
11 वैदिक आचार्यों द्वारा संपूर्ण नमकम-चमकम पाठ एवं एकादश रुद्राभिषेक।
