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57 पूजा दिखाई जा रही हैं
नवरात्रि पूजा (एक दिवसीय)
2 घंटेघर • मंदिर

नवरात्रि पूजा (एक दिवसीय)

नवरात्रि पूजा माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है। यह पूजा माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने, जीवन में सुख-समृद्धि, शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक की जाती है। एक दिवसीय नवरात्रि पूजा में माँ भगवती की आराधना, दुर्गा मंत्र जाप एवं विशेष पूजन किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ या दुर्गा मंत्र जाप, पुष्प अर्पण, दुर्गा आरती, हवन, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, माला, लाल पुष्प, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, फल, मिठाई, नारियल, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹3,100
नवरात्रि पूजा (9 दिन)
2 घंटेघर • मंदिर

नवरात्रि पूजा (9 दिन)

नवरात्रि पूजा माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है। यह पूजा नौ दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है, जिसमें प्रतिदिन माँ दुर्गा के एक स्वरूप की आराधना की जाती है। यह अनुष्ठान माँ भगवती की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में सुख-समृद्धि, शांति, साहस और आध्यात्मिक उन्नति की कामना हेतु किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा मंत्र जाप, पुष्प अर्पण, दुर्गा आरती, हवन, कन्या पूजन, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण नौ दिवसीय पूजा कराते हैं। सामग्री: माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, माला, लाल पुष्प, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, फल, मिठाई, जौ, मिट्टी का पात्र, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री, कन्या पूजन सामग्री एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹21,000
यज्ञ / शांति हवन
2 घंटेघर • मंदिर

यज्ञ / शांति हवन

यज्ञ एवं शांति हवन एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें अग्नि देव के माध्यम से वैदिक मंत्रों के साथ आहुति अर्पित की जाती है। यह अनुष्ठान घर, परिवार और आसपास के वातावरण में शांति, सकारात्मकता, सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक कल्याण की कामना हेतु किया जाता है। शांति हवन विशेष रूप से मानसिक शांति, पारिवारिक मंगल और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक संपन्न किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नवग्रह पूजन, अग्नि स्थापना, वैदिक मंत्र जाप, हवन आहुति, पूर्णाहुति, शांति पाठ एवं आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण यज्ञ एवं हवन कराते हैं। सामग्री: हवन कुंड, आम की लकड़ी, समिधा, हवन सामग्री, घी, जौ, तिल, अक्षत, नवग्रह सामग्री, कपूर, चंदन, रोली, कुमकुम, फूल, माला, नारियल, पान, सुपारी, फल, मिठाई, कलश, आम के पत्ते, धूप, दीपक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: यज्ञ की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, यज्ञ के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹3,100
सत्यनारायण कथा
2 घंटेघर • मंदिर

सत्यनारायण कथा

सत्यनारायण कथा भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप को समर्पित एक पारंपरिक हिंदू पूजा है। यह पूजा कृतज्ञता व्यक्त करने, दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने और शांति, समृद्धि तथा कल्याण की कामना हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, सत्यनारायण पूजा, कथा वाचन, प्रसाद वितरण, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, चंदन, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य और पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹3,500
नवग्रह शांति / हवन
2 घंटेघर • मंदिर

नवग्रह शांति / हवन

नवग्रह शांति पूजा एवं हवन नौ ग्रह देवताओं की आराधना हेतु की जाती है। यह पूजा शांति, कल्याण और ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों से राहत हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नवग्रह पूजा, नवग्रह मंत्र जाप, ग्रह शांति अनुष्ठान, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: नवग्रह पूजा सामग्री, कलश, नारियल, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, विभिन्न अनाज, तिल, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

पूजा शुल्क₹3,100
जन्मदिन पूजन / मार्कंडेय पूजन
1 घंटाघर • मंदिर

जन्मदिन पूजन / मार्कंडेय पूजन

जन्मदिन पूजन एवं मार्कण्डेय पूजन एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है, जो जन्मदिवस के शुभ अवसर पर दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना हेतु किया जाता है। यह पूजा भगवान गणेश, भगवान शिव, आयु के देवता एवं ऋषि मार्कण्डेय जी के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक संपन्न की जाती है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य जीवन में सकारात्मकता, आध्यात्मिक उन्नति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करना है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नवग्रह पूजन, आयुष मंत्र जाप, महामृत्युंजय मंत्र जाप, मार्कण्डेय ऋषि पूजन, जन्म नक्षत्र पूजन, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: भगवान शिव एवं गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, माला, बेलपत्र, दूर्वा, पान, सुपारी, फल, मिठाई, पंचामृत, घी, हवन सामग्री, जौ, तिल, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, जन्म नक्षत्र तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹2,500
प्रायोजित
दुर्गा पूजा / दुर्गा सप्तशती पाठ
2 घंटेघर • मंदिर

दुर्गा पूजा / दुर्गा सप्तशती पाठ

दुर्गा पूजा और दुर्गा सप्तशती पाठ माँ दुर्गा एवं उनके दिव्य स्वरूपों को समर्पित पवित्र अनुष्ठान हैं। यह पूजा माँ दुर्गा से शक्ति, रक्षा, सुख-शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना हेतु पारंपरिक रूप से की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ दुर्गा पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ, नवार्ण मंत्र जाप, हवन, पूर्णाहुति एवं माँ दुर्गा की आरती सम्मिलित है। पंडित जी वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पूर्ण पूजा संपन्न कराते हैं। सामग्री: माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, लाल फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, चंदन, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री, दुर्गा सप्तशती पुस्तक एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: सटीक अवधि, मंत्र संख्या, पाठ, हवन विधि और सामग्री नवरात्रि, पारिवारिक परंपरा और पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹3,100
सुंदरकांड पाठ
3 घंटेघर • मंदिर

सुंदरकांड पाठ

सुंदरकांड पाठ रामचरितमानस का एक पवित्र पाठ है, जिसमें भगवान हनुमान जी की भक्ति, साहस, बुद्धिमत्ता और माता सीता की खोज में उनकी अद्भुत यात्रा का वर्णन मिलता है। यह पाठ भगवान हनुमान जी एवं प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में साहस, भक्ति, शांति और आध्यात्मिक शक्ति की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, सुंदरकांड पाठ, हनुमान मंत्र जाप, हनुमान आरती, श्रीराम आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पाठ एवं पूजा कराते हैं। सामग्री: रामचरितमानस / सुंदरकांड पुस्तक, भगवान हनुमान जी एवं श्रीराम जी की तस्वीर या मूर्ति, फूल, सिंदूर, चमेली का तेल, रोली, कुमकुम, अक्षत, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, फल, मिठाई, गुड़, धूप, कपूर, दीपक, घी एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पाठ की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि श्रद्धालुओं की संख्या, परिवार की परंपरा तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹6,500
सुंदरकांड पाठ (संगीतमय)
4 घंटेघर • मंदिर

सुंदरकांड पाठ (संगीतमय)

सुंदरकांड पाठ संगीत सहित रामचरितमानस का एक भक्तिमय एवं पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें भगवान हनुमान जी की भक्ति, साहस, बुद्धिमत्ता और माता सीता की खोज में उनकी अद्भुत यात्रा का वर्णन संगीतमय चौपाइयों एवं भजनों के माध्यम से किया जाता है। यह पाठ भगवान हनुमान जी एवं प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन में सुख-शांति, साहस, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, संगीतमय सुंदरकांड पाठ, हनुमान मंत्र जाप, भजन-कीर्तन, हनुमान आरती, श्रीराम आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी एवं भजन मंडली पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पाठ एवं संगीतमय भक्ति कार्यक्रम संपन्न कराते हैं। सामग्री: रामचरितमानस / सुंदरकांड पुस्तक, भगवान हनुमान जी एवं श्रीराम जी की तस्वीर या मूर्ति, फूल, माला, सिंदूर, चमेली का तेल, रोली, कुमकुम, अक्षत, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, फल, मिठाई, गुड़, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, भजन एवं संगीत के लिए आवश्यक साउंड सिस्टम तथा अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पाठ की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि श्रद्धालुओं की संख्या, संगीत मंडली की व्यवस्था, परिवार की परंपरा तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹15,000
लक्ष्मी पूजा (दीपावली)
1 घंटाघर • मंदिर

लक्ष्मी पूजा (दीपावली)

लक्ष्मी पूजा दीपावली पर देवी लक्ष्मी की आराधना हेतु की जाती है। यह पूजा धन, समृद्धि और सौभाग्य की कामना हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश-लक्ष्मी पूजा, कलश स्थापना, लक्ष्मी मंत्र जाप, श्री सूक्त पाठ, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: लक्ष्मी-गणेश मूर्ति, कलश, नारियल, कमल का फूल, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, चंदन, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

पूजा शुल्क₹3,100
विश्वकर्मा पूजा
1 घंटाघर • मंदिर

विश्वकर्मा पूजा

विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है, जिन्हें देवताओं का दिव्य शिल्पकार एवं वास्तुकार माना जाता है। यह पूजा विशेष रूप से कारखानों, कार्यशालाओं, दुकानों, कार्यालयों, निर्माण स्थलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में की जाती है। यह अनुष्ठान कार्य में सफलता, व्यापार में उन्नति, मशीनों एवं उपकरणों की सुरक्षा तथा सुख-समृद्धि की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, भगवान विश्वकर्मा का पूजन, औजार एवं मशीनों का पूजन, विश्वकर्मा मंत्र जाप, पुष्प अर्पण, आरती, हवन, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, माला, पान, सुपारी, फल, मिठाई, लाल या पीला वस्त्र, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी, हवन सामग्री, औजार एवं मशीनों के पूजन हेतु आवश्यक सामग्री तथा अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि प्रतिष्ठान की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹3,100
गणेश चतुर्थी / गणेश पूजा
1.5 घंटेघर • मंदिर

गणेश चतुर्थी / गणेश पूजा

गणेश चतुर्थी / गणेश पूजा भगवान गणेश की आराधना हेतु की जाती है, जो विघ्नहर्ता तथा बुद्धि, समृद्धि और शुभ आरंभ के देवता हैं। पूजा विधि में संकल्प, गणेश स्थापना, षोडशोपचार पूजा, गणेश मंत्र जाप, मोदक अर्पण, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: गणेश मूर्ति, कलश, नारियल, दूर्वा घास, मोदक, फूल, फल, मिठाई, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

पूजा शुल्क₹3,100
सरस्वती पूजा
1 घंटाघर • मंदिर

सरस्वती पूजा

सरस्वती पूजा माँ सरस्वती को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है, जिन्हें ज्ञान, विद्या, बुद्धि, संगीत, कला और वाणी की देवी माना जाता है। यह पूजा विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों एवं ज्ञानार्जन करने वालों द्वारा माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त करने तथा शिक्षा, एकाग्रता, रचनात्मकता और बुद्धि के विकास की कामना हेतु श्रद्धापूर्वक की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ सरस्वती का पूजन, सरस्वती मंत्र जाप, पुस्तक एवं लेखनी पूजन, पुष्प अर्पण, सरस्वती वंदना, आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण पूजा कराते हैं। सामग्री: माँ सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, पीले या सफेद फूल, माला, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, हल्दी, पान, सुपारी, फल, मिठाई, पीले वस्त्र, पुस्तकें, कॉपी, कलम, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी एवं अन्य आवश्यक पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, मंत्र जाप संख्या, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, पूजा के उद्देश्य तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹3,100
तुलसी विवाह
3 घंटेघर • मंदिर

तुलसी विवाह

तुलसी विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप एवं माता तुलसी को समर्पित एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है। यह पूजा देवउठनी एकादशी एवं कार्तिक मास में श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न की जाती है। तुलसी विवाह में माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया जाता है। यह अनुष्ठान परिवार में सुख-शांति, वैवाहिक मंगल, समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने हेतु किया जाता है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माता तुलसी का पूजन, भगवान शालिग्राम का पूजन, विवाह मंडप सजावट, वरमाला, कन्यादान, मंगलाष्टक, विवाह मंत्र, आरती एवं प्रसाद वितरण सम्मिलित है। पंडित जी पारंपरिक विवाह विधि-विधान के अनुसार संपूर्ण तुलसी विवाह संपन्न कराते हैं। सामग्री: माता तुलसी का पौधा, भगवान शालिग्राम या विष्णु जी की मूर्ति, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल चुनरी, पीले वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, माला, गन्ना, आंवला, पान, सुपारी, हल्दी, मेहंदी, फल, मिठाई, मखाना, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, घी एवं अन्य आवश्यक विवाह एवं पूजा सामग्री। नोट: पूजा की सटीक विधि, विवाह की रस्में, सामग्री और अवधि परिवार की परंपरा, स्थानीय रीति-रिवाजों तथा पंडित जी के मार्गदर्शन के अनुसार भिन्न हो सकती है।

पूजा शुल्क₹6,500
अखंड रामायण पाठ
24 घंटेघर • मंदिर

अखंड रामायण पाठ

5 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 24 घंटे का निरंतर अखंड श्री रामचरितमानस पाठ।

पूजा शुल्क₹31,000
करवा चौथ पूजा
1 घंटाघर • मंदिर

करवा चौथ पूजा

करवा चौथ करवा चौथ सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखा जाने वाला एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश, कार्तिकेय जी और करवा माता से अखंड सौभाग्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। इस पर्व की शुरुआत सूर्योदय से पूर्व ब्रह्ममुहूर्त में सरगी ग्रहण करने के साथ होती है। शाम के समय पूजा का आरंभ संकल्प, गणेश पूजन तथा भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता के आह्वान के साथ होता है। सभी महिलाएं एकत्रित होकर करवा चौथ की पावन व्रत कथा सुनती हैं और पारंपरिक रूप से थाली फेरने की रस्म निभाती हैं। चंद्रोदय होने पर लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, छलनी से चंद्र देव और पति के दर्शन कर आरती उतारी जाती है, तथा पति के हाथों जल व मीठा ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। इसके पश्चात घर के बड़ों का आशीर्वाद लेकर प्रसाद का वितरण किया जाता है। सामग्री: मिट्टी या पीतल का करवा (ढक्कन सहित), छलनी, पूजा की थाली, दीपक, घी या तेल, रुई की बत्ती, अर्घ्य के लिए कलश/लोटा, करवा चौथ की तस्वीर या कैलेंडर, करवा चौथ व्रत कथा पुस्तक, रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत (चावल), फूल, माला, फल, मिठाई, सूखा मेवा, पान के पत्ते, सुपारी, धूप, कपूर, और संपूर्ण सुहाग सामग्री (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, चुनरी आदि)। नोट: करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्र दर्शन और पूजन संपन्न होने तक पूर्णतः निर्जला रखा जाता है। विभिन्न शहरों और क्षेत्रों के अनुसार चंद्रोदय का समय भिन्न हो सकता है। पारिवारिक परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार पूजन विधि तथा आवश्यक सामग्री में आंशिक अंतर हो सकता है।

पूजा शुल्क₹2,100
गणपति अथर्वशीर्ष पाठ
3 घंटेघर • मंदिर

गणपति अथर्वशीर्ष पाठ

गणपति अथर्वशीर्ष पाठ अथर्ववेद का एक अत्यंत पावन और सिद्ध वैदिक सूक्त है, जो विघ्नहर्ता, बुद्धि व रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश को समर्पित है। भक्तजन अपने जीवन से संकटों और बाधाओं के निवारण, मानसिक शांति, व्यापार व कार्यक्षेत्र में उन्नति तथा परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए श्रद्धापूर्वक यह पाठ कराते हैं। पूजन का आरंभ आचमन, संकल्प, कलश स्थापना और भगवान गणेश के षोडशोपचार पूजन से होता है, जिसके अंतर्गत पंचामृत व गंगाजल से गणपति बप्पा का अभिषेक किया जाता है। इसके पश्चात निर्धारित संकल्प के अनुसार पुरोहितों या भक्तों द्वारा गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ (जैसे 11, 21 या 108 आवर्तन) किए जाते हैं और प्रत्येक पाठ के साथ दूर्वा एवं लाल पुष्प अर्पित किए जाते हैं। अंत में भगवान गणेश की आरती, पुष्पांजलि, मोदक का भोग और प्रसाद वितरण के साथ पूजा संपन्न होती है। सामग्री: भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र, दूर्वा (दूब घास), लाल गुड़हल के फूल या माला, मोदक या मोतीचूर के लड्डू, कलश, नारियल, आम के पत्ते, जनेऊ, रोली, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत (चावल), पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), गंगाजल, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, ऋतु फल, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, शुद्ध घी, रुई की बत्ती और भोग/प्रसाद। नोट: गणपति अथर्वशीर्ष पाठ संकल्प के अनुसार सामान्य पाठ अथवा एकादश (11), 21 या 108 आवर्तनों में कराया जा सकता है। पाठ के दौरान शुद्ध वैदिक उच्चारण और शुचिता का विशेष महत्व होता है। पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजन विधि तथा आवश्यक सामग्री में आंशिक भिन्नता हो सकती है।

पूजा शुल्क₹15,000
विष्णु सहस्रनाम पाठ
3 घंटेघर • मंदिर

विष्णु सहस्रनाम पाठ

विष्णु सहस्रनाम पाठ महाभारत के अनुशासन पर्व से उद्धृत एक अत्यंत सिद्ध और कल्याणकारी स्तोत्र है, जिसमें जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु के 1000 दिव्य नामों की महिमा का वर्णन है। भक्तजन अपने जीवन से समस्त संकटों, ग्रहों के दोषों और नकारात्मक ऊर्जा के निवारण, मानसिक शांति, आरोग्य तथा भगवान नारायण और माता लक्ष्मी की कृपा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए यह पाठ कराते हैं। पूजन का आरंभ आचमन, संकल्प, गणेश पूजन और कलश स्थापना से होता है। इसके उपरांत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिवत षोडशोपचार पूजन व पंचामृत अभिषेक किया जाता है। इसके पश्चात विष्णु सहस्रनाम का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है, जिसमें प्रायः प्रत्येक नाम के साथ तुलसी दल एवं पीले पुष्प अर्पित करते हुए नामावली अर्चना की जाती है। अनुष्ठान का समापन फलश्रुति वाचन, श्री विष्णु जी की आरती, पुष्पांजलि, सात्विक भोग और प्रसाद वितरण के साथ होता है। सामग्री: भगवान विष्णु या शालिग्राम जी की प्रतिमा/चित्र, माता लक्ष्मी का चित्र, तुलसी दल व मंजरी, पीले फूल व माला, पीला वस्त्र (पीतांबर), पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), गंगाजल, कलश, नारियल, आम के पत्ते, जनेऊ, पीला चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, ऋतु फल (विशेष रूप से केला), पीली मिठाई या खीर, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, शुद्ध गाय का घी, रुई की बत्ती और भोग/प्रसाद। नोट: विष्णु सहस्रनाम पाठ सामान्य स्तोत्र पाठ के रूप में या प्रत्येक नाम के साथ तुलसी पत्र अर्पित करते हुए सहस्र नामावली अर्चना के रूप में आयोजित किया जा सकता है। पाठ के दौरान शुद्ध उच्चारण और शुचिता का विशेष महत्व माना गया है। कुल परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजन विधि तथा आवश्यक सामग्री में आंशिक अंतर हो सकता है।

पूजा शुल्क₹15,000
प्रायोजित
भूमि पूजन
1 घंटाघर • मंदिर

भूमि पूजन

भूमि पूजन किसी भी भूखंड पर गृह, भवन अथवा व्यावसायिक निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व संपन्न की जाने वाली एक पावन और अनिवार्य वैदिक परंपरा है। यह अनुष्ठान धरती माता (भूमि देवी) के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने तथा निर्माण कार्य के दौरान भूमि में निवास करने वाले सूक्ष्म जीवों को होने वाले कष्ट के लिए क्षमा याचना हेतु किया जाता है। भक्तजन निर्माण कार्य के निर्विघ्न पूर्ण होने, भवन की स्थिरता तथा उसमें निवास करने वालों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के लिए भगवान गणेश, भूमि देवी, वास्तु पुरुष और शेषनाग जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजन का आरंभ प्रायः भूमि के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में आचमन, संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह पूजन से होता है। इसके पश्चात भूमि का शुद्धिकरण कर निर्धारित स्थान पर सांकेतिक खुदाई की जाती है। उस पावन गड्ढे में चांदी के शेषनाग, कछुआ, सिक्के, पंचरत्न और सुपारी विधिवत स्थापित किए जाते हैं तथा पहली ईंट रखकर शिला न्यास संपन्न किया जाता है। अनुष्ठान का समापन वास्तु शांति मंत्रोच्चार, आरती, सात्विक भोग और प्रसाद वितरण के साथ होता है। सामग्री: पांच ईंटें (शिला), खुदाई हेतु खुरपी या कुदाल, चांदी के शेषनाग और कछुआ, कलश, नारियल, आम या अशोक के पत्ते, लाल व पीला वस्त्र, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), रोली, हल्दी की गांठ व पाउडर, कुमकुम, चंदन, अक्षत (चावल), पंचरत्न या चांदी/तांबे के सिक्के, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, फूल, पुष्पमाला, ऋतु फल, मिठाई, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, शुद्ध घी, रुई की बत्ती और प्रसाद। नोट: भूमि पूजन पंचांग और वास्तु शास्त्र के अनुसार शुभ मुहूर्त में संपन्न कराया जाता है, जिसमें सामान्यतः ईशान कोण में प्रथम खुदाई और शिला न्यास का विधान होता है। कुल परंपरा, स्थानीय मान्यताओं और वास्तु परामर्श के अनुसार पूजन विधि तथा आवश्यक सामग्री में आंशिक अंतर हो सकता है।

पूजा शुल्क₹3,100
वट सावित्री पूजा
1 घंटाघर • मंदिर

वट सावित्री पूजा

वट सावित्री पूजा सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए किया जाने वाला एक अत्यंत पावन और फलदायी व्रत है। यह व्रत माता सावित्री के त्याग, निष्ठा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है, जिन्होंने अपने तपोबल से यमराज से भी अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त कर लिए थे। इस दिन त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के स्वरूप माने जाने वाले वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की विशेष पूजा की जाती है। पूजन का आरंभ आचमन, संकल्प, गणेश पूजन तथा माता सावित्री, सत्यवान और यमराज के आह्वान के साथ होता है। व्रती महिलाएं वट वृक्ष की जड़ में जल, पंचामृत, रोली, अक्षत, पुष्प और भीगे हुए काले चने अर्पित करती हैं। इसके उपरांत वृक्ष के तने पर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए 7 या 108 बार परिक्रमा की जाती है। सभी महिलाएं एकत्रित होकर वट सावित्री व्रत कथा सुनती हैं, बांस के पंखे से हवा झलकर पारंपरिक रस्में निभाती हैं, तथा आरती और भोग समर्पण के उपरांत घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर प्रसाद का वितरण करती हैं। सामग्री: कच्चा सूत या मौली (कलावा), भीगे हुए काले चने, बांस का पंखा, वट वृक्ष की डाली (यदि घर पर पूजन कर रहे हों), कलश, नारियल, आम के पत्ते, रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत (चावल), फूल व पुष्पमाला, ऋतु फल (विशेषकर आम, खरबूजा, केला), पारंपरिक नैवेद्य (पूड़ी, गुलगुले/पुआ, मिठाई), पान के पत्ते, सुपारी, कपूर, धूपबत्ती, दीपक, शुद्ध घी, रुई की बत्ती, गंगाजल, और संपूर्ण सुहाग सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, आलता, मेहंदी, लाल चुनरी)। नोट: वट सावित्री व्रत उत्तर भारत में मुख्यतः ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और कुछ अन्य राज्यों में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) के दिन मनाया जाता है। कुल परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजन विधि, परिक्रमा की संख्या तथा आवश्यक सामग्री में आंशिक भिन्नता हो सकती है।

पूजा शुल्क₹2,100
गृह प्रवेश पूजा
3 घंटेघर • मंदिर

गृह प्रवेश पूजा

गृह प्रवेश पूजा किसी नवीन निर्मित, क्रय किए गए अथवा पुनर्निर्मित मकान में विधिवत निवास प्रारंभ करने से पूर्व संपन्न कराया जाने वाला एक अत्यंत पावन और अनिवार्य वैदिक अनुष्ठान है। यह पूजा गृह के समस्त वास्तु दोषों और नकारात्मक शक्तियों के निवारण, वातावरण के शुद्धिकरण तथा परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि के वास हेतु भगवान श्री गणेश, वास्तु पुरुष, नवग्रह और कुलदेवी-देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। पूजन का आरंभ मुख्य द्वार पर तोरण बांधने, नारियल फोड़ने और मंगल कलश लेकर शुभ मुहूर्त में दाहिना पैर आगे बढ़ाकर गृह में प्रवेश करने (द्वार पूजन) के साथ होता है। इसके उपरांत पूजा स्थल पर आचमन, संकल्प, गणेश पूजन, वास्तु शांति पूजन, नवग्रह पूजन तथा कुलदेवता का आह्वान किया जाता है। घर में सुख-समृद्धि और अन्न-धन की संपन्नता के प्रतीक स्वरूप नए पात्र में दूध उफनाने की पारंपरिक रस्म निभाई जाती है। इसके पश्चात घर के वातावरण की शुद्धि हेतु नवग्रह व वास्तु शांति हवन संपन्न होता है, और अनुष्ठान का समापन पूर्णाहुति, महाआरती, संपूर्ण घर में गंगाजल छिड़काव और प्रसाद वितरण के साथ होता है। सामग्री: मंगल कलश, नारियल, आम या अशोक के पत्ते, मुख्य द्वार का तोरण (आम के पत्ते/गेंदे के फूल), दूध उफनाने हेतु नया पात्र, कच्चा दूध, चीनी, अक्षत (चावल), भगवान गणेश व माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र, वास्तु यंत्र/प्रतिमा, लाल व पीला वस्त्र, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), रोली, कुमकुम, हल्दी की गांठ व पाउडर, चंदन, जनेऊ, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, फूल, पुष्पमाला, ऋतु फल, मिठाई, हवन कुंड, हवन सामग्री, सूखा गोला (नारियल), कपूर, धूपबत्ती, अगरबत्ती, दीपक, शुद्ध गाय का घी, रुई की बत्ती और प्रसाद। नोट: गृह प्रवेश पूजा पंचांग और वास्तु शास्त्र के अनुसार निकाले गए अत्यंत शुभ मुहूर्त (अपूर्व, सपूर्व अथवा द्वंद्व प्रवेश) में ही की जाती है। दूध उफनाने की रस्म, विशिष्ट विधियां तथा आवश्यक सामग्री कुल परंपरा और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार आंशिक रूप से भिन्न हो सकती हैं।

पूजा शुल्क₹6,500
घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
4 घंटेघर

घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा

घर के मंदिर में देव मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा और वैदिक अभिषेक का पावन अनुष्ठान।

पूजा शुल्क₹18,000
सगाई पूजा (वाग्दान)
2 घंटेघर • मंदिर

सगाई पूजा (वाग्दान)

सगाई पूजन (वाग्दान संस्कार) विवाह से पूर्व संपन्न कराया जाने वाला एक अत्यंत मांगलिक और महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है, जो वर और वधू के वैवाहिक संबंध की औपचारिक नींव रखता है तथा दो परिवारों को आत्मीय सूत्र में जोड़ता है। यह पूजन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश, कुलदेवी-देवता और नवग्रहों से आगामी वैवाहिक जीवन के निर्विघ्न संपन्न होने, वर-वधू के मध्य परस्पर प्रेम, सामंजस्य तथा दोनों कुलों की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। पूजन का आरंभ आचमन, पवित्रिकरण, संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना तथा कुलदेवता व नवग्रहों के आह्वान से होता है। इसके उपरांत दोनों पक्षों के पुरोहितों की उपस्थिति में औपचारिक वचनबद्धता (वाग्दान संकल्प) और तिलक की रस्म निभाई जाती है। वैदिक मंत्रोच्चार, गंगाजल और अक्षत से सगाई की अंगूठियों को अभिमंत्रित कर शुद्ध किया जाता है, जिसके बाद वर-वधू एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। अनुष्ठान का समापन भगवान गणेश की आरती, वर-वधू द्वारा बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ग्रहण करने, शगुन व उपहारों के आदान-प्रदान और प्रसाद वितरण के साथ होता है। सामग्री: भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र, सगाई की अंगूठियां, पूजा की थाली, कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल व पीला वस्त्र, जनेऊ, गंगाजल, रोली, कुमकुम, हल्दी की गांठ व पाउडर, चंदन, अक्षत (चावल), ताजे फूल, पुष्पमाला, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, सूखा मेवा, ऋतु फल, पारंपरिक मिठाई, शगुन सामग्री/लिफाफे, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, शुद्ध घी, रुई की बत्ती और भोग/प्रसाद। नोट: सगाई पूजन पंचांग और वर-वधू की जन्म पत्रिका के आधार पर निकाले गए शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाता है। क्षेत्रीय मान्यताओं और कुल परंपराओं के अनुसार वाग्दान, तिलक, रोली-चावल, चुनरी चढ़ाने और अंगूठी पहनाने की रस्मों में आंशिक अंतर हो सकता है।

पूजा शुल्क₹4,100
नामकरण संस्कार पूजा
2 घंटेघर • मंदिर

नामकरण संस्कार पूजा

नामकरण संस्कार हिंदू धर्म के सोलह प्रमुख वैदिक संस्कारों (षोडश संस्कार) में से एक अत्यंत पावन और अनिवार्य संस्कार है, जिसके माध्यम से नवजात शिशु को विधिपूर्वक एक शुभ और नक्षत्र-सम्मत नाम प्रदान किया जाता है। यह अनुष्ठान शिशु के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, प्रखर बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना तथा उस पर भगवान श्री गणेश, कुलदेवी-देवता और नवग्रहों की कृपा दृष्टि बनाए रखने के लिए श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। पूजन का आरंभ शुद्धि, संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना, नवग्रह पूजन तथा कुलदेवता के आह्वान से होता है। शिशु के ग्रह दोष निवारण और दीर्घायु की कामना हेतु आयुष्य हवन संपन्न किया जाता है। ज्योतिषाचार्य द्वारा शिशु के जन्म नक्षत्र व राशि के अनुसार शुभ नामाक्षर निर्धारित किया जाता है, जिसके पश्चात पिता (अथवा बुआ/वरिष्ठ परिजन) द्वारा पान के पत्ते या कुशा की सहायता से शिशु के दाहिने कान में चयनित पावन नाम धीरे से फूंका जाता है। इसके उपरांत शिशु को सुसज्जित पालने में झुलाने, स्वजनों द्वारा आशीष प्रदान करने, आरती और प्रसाद वितरण के साथ अनुष्ठान पूर्ण होता है। सामग्री: शिशु और माता-पिता हेतु नए वस्त्र, सुसज्जित पालना या नवीन बिछौना, कलश, नारियल, आम के पत्ते, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), रोली, कुमकुम, चंदन, हल्दी, अक्षत (चावल), पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, शहद, कुशा घास, फूल, पुष्पमाला, ऋतु फल, मिठाई, हवन कुंड, हवन सामग्री, सूखा गोला, कपूर, धूप, दीपक, शुद्ध गाय का घी, रुई की बत्ती और प्रसाद। नोट: नामकरण संस्कार सामान्यतः शिशु के जन्म के 11वें, 12वें, 21वें दिन अथवा पंचांग व जन्म नक्षत्र के अनुसार निकाले गए किसी अन्य शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाता है। शिशु के कान में नाम बोलने की रस्म और पालने से जुड़ी परंपराएं कुल परंपरा तथा क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार आंशिक रूप से भिन्न हो सकती हैं।

पूजा शुल्क₹4,100
अन्नप्राशन संस्कार
2 घंटेघर • मंदिर

अन्नप्राशन संस्कार

अन्नप्राशन संस्कार हिंदू धर्म के प्रमुख षोडश संस्कारों (सोलह संस्कारों) में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक संस्कार है, जो शिशु को केवल तरल आहार (दूध) से प्रथम बार ठोस अन्न ग्रहण कराने के पावन अवसर पर संपन्न किया जाता है। यह अनुष्ठान शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, सुदृढ़ पाचन तंत्र, दीर्घायु, तेजस्विता और प्रखर बुद्धि की कामना तथा उस पर देवी अन्नपूर्णा, भगवान श्री गणेश और कुलदेवी-देवता की अनवरत कृपा बनाए रखने के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाता है। पूजन का आरंभ आचमन, संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना और माता अन्नपूर्णा व नवग्रहों के आह्वान से होता है। इसके उपरांत शिशु के आरोग्य और दीर्घायु हेतु मंगलकारी हवन संपन्न किया जाता है। मुख्य रस्म के रूप में चांदी की कटोरी और चम्मच से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिशु को पहली बार सात्विक खीर अथवा शहद-दही मिश्रित अन्न चटाया जाता है, जिसे पारंपरिक रूप से मामा, पिता अथवा घर के वरिष्ठ परिजनों द्वारा कराया जाता है। इसके पश्चात शिशु के सम्मुख प्रतीकात्मक वस्तुएं (जैसे पुस्तक, कलम, सिक्का/स्वर्ण, मिट्टी आदि) रखकर उसकी स्वाभाविक रुचि व प्रवृत्ति जानने की रस्म निभाई जाती है। अनुष्ठान का समापन आरती, स्वजनों द्वारा आशीर्वाद और प्रसाद वितरण के साथ होता है। सामग्री: चांदी की कटोरी और चम्मच, गाय के दूध से बनी सात्विक खीर, शिशु और माता-पिता हेतु नवीन वस्त्र, कलश, नारियल, आम के पत्ते, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), रोली, कुमकुम, चंदन, हल्दी, अक्षत (चावल), पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, ताजे फूल, पुष्पमाला, ऋतु फल, मिठाई, हवन कुंड, हवन सामग्री, सूखा गोला, शुद्ध गाय का घी, कपूर, धूप, दीपक, रुई की बत्ती, प्रतीकात्मक वस्तुएं (पुस्तक, कलम, सिक्का) और प्रसाद। नोट: अन्नप्राशन संस्कार सामान्यतः बालक के लिए सम महीनों (जैसे छठे या आठवें महीने) में और बालिका के लिए विषम महीनों (जैसे पांचवें या सातवें महीने) में पंचांग अनुसार शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाता है। प्रथम ग्रास खिलाने से जुड़े पारिवारिक नियम और प्रतीकात्मक रस्में कुल परंपरा तथा स्थानीय मान्यताओं के अनुसार आंशिक रूप से भिन्न हो सकती हैं।

पूजा शुल्क₹2,100
मुंडन संस्कार पूजा
2 घंटेघर • मंदिर

मुंडन संस्कार पूजा

मुंडन पूजा, जिसे वैदिक परंपरा में चूड़ाकरण संस्कार कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख षोडश संस्कारों में से एक अत्यंत पावन और अनिवार्य संस्कार है। इसके अंतर्गत नवजात शिशु के जन्मकालीन केशों को विधिपूर्वक पहली बार मुंडित कराया जाता है। यह अनुष्ठान शिशु को पूर्व जन्मों के संचित कर्म दोषों और अशुद्धियों से मुक्त करने, सिर के स्नायु तंत्र को सक्रिय कर बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने, तथा उत्तम स्वास्थ्य, तेजस्विता व दीर्घायु की प्राप्ति हेतु भगवान श्री गणेश और कुलदेवी-देवता के आशीर्वाद से संपन्न कराया जाता है। पूजन का आरंभ आचमन, संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह आह्वान से होता है, जिसके पश्चात शिशु के आरोग्य और दीर्घायु की कामना हेतु आयुष्य हवन किया जाता है। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नाई द्वारा शिशु का मुंडन संस्कार संपन्न कराया जाता है (पारंपरिक रूप से सिर के मध्य में शिखा यानी चोटी रखी जाती है)। कटे हुए बालों को आटे की लोई अथवा वस्त्र में एकत्र कर पवित्र नदी में विसर्जित करने हेतु सुरक्षित रखा जाता है। मुंडन के पश्चात शिशु के सिर पर गंगाजल का छिड़काव कर ठंडक और घाव निवारण हेतु हल्दी-चंदन का लेप लगाया जाता है। शिशु को स्नान कराकर नवीन वस्त्र धारण कराए जाते हैं, और अनुष्ठान का समापन आरती, स्वजनों के आशीर्वाद और प्रसाद वितरण के साथ होता है। सामग्री: नवीन उस्तरा/ब्लेड व कैंची, सिर भिगोने हेतु गुनगुना पानी या कच्चा दूध, हल्दी व चंदन का लेप, आटे की लोई या सूती पीला/लाल वस्त्र (बाल एकत्र करने हेतु), शिशु और माता-पिता के नए वस्त्र, कलश, नारियल, आम के पत्ते, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, ताजे फूल, पुष्पमाला, ऋतु फल, मिठाई, हवन कुंड, हवन सामग्री, सूखा गोला, कपूर, धूपबत्ती, दीपक, शुद्ध गाय का घी, रुई की बत्ती और प्रसाद। नोट: मुंडन संस्कार सामान्यतः शिशु के जन्म के प्रथम, तृतीय अथवा पंचम वर्ष (विषम वर्षों) में पंचांग अनुसार शुभ मुहूर्त में संपन्न कराया जाता है। कई परिवारों में यह संस्कार किसी पवित्र तीर्थ स्थल (जैसे गंगा तट) अथवा अपनी कुलदेवी/कुलदेवता के मंदिर में कराने की विशेष परंपरा होती है। कुल परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पूजन विधि तथा नियमों में आंशिक भिन्नता हो सकती है।

पूजा शुल्क₹2,100
विद्यारंभ संस्कार
1 घंटाघर • मंदिर

विद्यारंभ संस्कार

विद्यारम्भ संस्कार (जिसे दक्षिण भारत में अक्षराभ्यासम और पूर्वोत्तर में हाते-खोड़ी भी कहा जाता है) हिंदू धर्म के प्रमुख षोडश संस्कारों में से एक अत्यंत पावन और अनिवार्य वैदिक संस्कार है। यह संस्कार बालक/बालिका के विधिवत अक्षर ज्ञान, पठन-पाठन और औपचारिक शिक्षा के शुभारंभ का प्रतीक है। यह अनुष्ठान बालक में मेधा (तीक्ष्ण बुद्धि), एकाग्रता, ज्ञान पिपासा और सद्गुणों के विकास तथा विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश और देवगुरु बृहस्पति की असीम कृपा प्राप्त करने हेतु श्रद्धापूर्वक संपन्न कराया जाता है। पूजन का आरंभ आचमन, संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना तथा विद्या की देवी मां सरस्वती और गुरु के आह्वान से होता है। इसके उपरांत अध्ययन की सामग्रियों—जैसे स्लेट, कॉपी, कलम और पाठ्यपुस्तकों का विधिवत पुस्तक-लेखनी पूजन किया जाता है। मुख्य अनुष्ठान में पिता, माता अथवा कुलगुरु द्वारा शिशु की उंगली पकड़कर कांसे या चांदी की थाली में बिछे अक्षत (चावल) पर अथवा स्लेट पर ॐ, स्वास्तिक, 'श्री' अथवा 'हरि ॐ' जैसे पावन अक्षरों का आलेखन कराया जाता है। शिशु के बौद्धिक विकास और प्रखर स्मरण शक्ति हेतु सरस्वती अथवा मेधा हवन संपन्न किया जाता है, जिसके पश्चात मां सरस्वती की आरती, गुरुजनों व बड़ों का आशीर्वाद और पीले प्रसाद का वितरण किया जाता है। सामग्री: स्लेट व खड़िया (चॉक) अथवा नवीन कॉपी व पेन, पीतल/कांसे की थाली, अक्षत (चावल - थाली में बिछाने हेतु), हल्दी की गांठ या सोने का सिक्का/शलाका (लिखने हेतु), मां सरस्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र, पीला या श्वेत वस्त्र, कलश, नारियल, आम के पत्ते, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), गंगाजल, पीला चंदन, रोली, कुमकुम, पीले फूल व पुष्पमाला, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, ऋतु फल, पीली मिठाई (बूंदी के लड्डू या खीर), हवन कुंड, हवन सामग्री, सूखा गोला, कपूर, धूपबत्ती, दीपक, शुद्ध गाय का घी, रुई की बत्ती और प्रसाद। नोट: विद्यारम्भ संस्कार सामान्यतः शिशु के 3 से 5 वर्ष की आयु में, विशेष रूप से बसंत पंचमी, विजयादशमी अथवा पंचांग अनुसार निकाले गए शुभ मुहूर्त में संपन्न कराया जाता है। प्रथम अक्षर लिखवाने की परंपरा और पारिवारिक रस्में कुल परंपरा तथा क्षेत्रीय मान्यताओं (जैसे दक्षिण भारत में अक्षराभ्यासम एवं बंगाल में हाते-खोड़ी) के अनुसार आंशिक रूप से भिन्न हो सकती हैं।

पूजा शुल्क₹2,100
कर्णवेध संस्कार
1 घंटाघर • मंदिर

कर्णवेध संस्कार

शिशु के शारीरिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और धार्मिक शुद्धि के लिए कर्णवेध संस्कार।

पूजा शुल्क₹7,100
यज्ञोपवीत संस्कार (जनेऊ)
18 घंटेघर • मंदिर

यज्ञोपवीत संस्कार (जनेऊ)

वैदिक रीति से जनेऊ धारण और गायत्री दीक्षा का दो दिवसीय पवित्र यज्ञोपवीत संस्कार।

पूजा शुल्क₹15,000
कुंभ विवाह / अर्क विवाह
2 घंटेघर • मंदिर

कुंभ विवाह / अर्क विवाह

मांगलिक दोष और विवाह बाधा निवारण के लिए कुंभ अथवा अर्क वृक्ष से विवाह अनुष्ठान।

पूजा शुल्क₹3,100
प्रायोजित
हल्दी समारोह
1 घंटाघर • मंदिर

हल्दी समारोह

विवाह पूर्व वर-वधू को हल्दी लगाने का पारंपरिक और मांगलिक उत्सव।

पूजा शुल्क₹3,100
विवाह संस्कार
4 घंटेघर • मंदिर

विवाह संस्कार

सप्तपदी, कन्यादान और पाणिग्रहण सहित संपूर्ण वैदिक विवाह संस्कार।

पूजा शुल्क₹19,000
अंत्येष्टि संस्कार / पिंड दान
1 घंटाघर • मंदिर

अंत्येष्टि संस्कार / पिंड दान

स्वर्गवासी आत्मा की सद्गति और मोक्ष प्राप्ति के लिए 12 दिवसीय विधिपूर्वक पिंडदान एवं श्राद्ध।

पूजा शुल्क₹21,000
पितृ दोष निवारण पूजा
4 घंटेघर • मंदिर

पितृ दोष निवारण पूजा

पितृ दोष निवारण पूजा पूर्वजों का सम्मान करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, पितृ देवता पूजा, तर्पण, नवग्रह पूजा, मंत्र जाप, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: कलश, नारियल, दर्भ/कुश घास, काले तिल, जौ, चावल, फूल, फल, दूध, घी, पान, सुपारी, रोली, कुमकुम, अक्षत, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, हवन सामग्री एवं अन्य सामग्री।

पूजा शुल्क₹31,000
गायत्री पूजा
4 घंटेघर • मंदिर

गायत्री पूजा

गायत्री पूजा माँ गायत्री को समर्पित एक पवित्र वैदिक आराधना है। यह पूजा शांति, पवित्रता, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, माँ गायत्री पूजा, गायत्री मंत्र जाप, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: कलश, नारियल, रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, चंदन, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

पूजा शुल्क₹1,31,000
मूल शांति पूजा
4 घंटेघर • मंदिर

मूल शांति पूजा

गंडमूल नक्षत्रों में जन्मे बालकों के दोष निवारण के लिए 27 वृक्षों के पत्तों व जल से मूल शांति पूजन।

पूजा शुल्क₹7,100
महामृत्युंजय जाप
4 घंटेघर • मंदिर

महामृत्युंजय जाप

असाध्य रोगों से मुक्ति, अकाल मृत्यु भय निवारण और दीर्घायु के लिए सवा लाख महामृत्युंजय जाप।

पूजा शुल्क₹1,25,000
वास्तु शांति पूजा
5 घंटेघर • मंदिर

वास्तु शांति पूजा

भवन और व्यापारिक स्थल के वास्तु दोषों के निवारण हेतु 3 पंडितों द्वारा वास्तु शांति यज्ञ।

पूजा शुल्क₹15,000
काल सर्प दोष पूजा
4 घंटेघर • मंदिर

काल सर्प दोष पूजा

काल सर्प दोष पूजा जन्म कुंडली में काल सर्प योग होने पर की जाती है। यह भगवान शिव, नाग देवता और नवग्रहों की पूजा के साथ शांति और कल्याण हेतु की जाती है। पूजा विधि में संकल्प, गणेश पूजा, कलश स्थापना, नाग देवता पूजा, शिव पूजा, नवग्रह पूजा, काल सर्प मंत्र जाप, अभिषेक, हवन, पूर्णाहुति एवं आरती सम्मिलित है। सामग्री: शिवलिंग, नाग देवता सामग्री, कलश, नारियल, दूध, गंगाजल, बिल्व पत्र, फूल, रोली, कुमकुम, अक्षत, काले तिल, जौ, फल, मिठाई, पान, सुपारी, घी, हवन सामग्री, अगरबत्ती, कपूर, दीपक एवं अन्य सामग्री।

पूजा शुल्क₹7,100
लक्ष्मी जाप
4 घंटेघर • मंदिर

लक्ष्मी जाप

स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति और धन-धान्य की वृद्धि के लिए 7 दिनों का विशेष महालक्ष्मी मंत्र जाप।

पूजा शुल्क₹1,25,000
गणपति यज्ञ / षष्ठार्चन
3 घंटेघर • मंदिर

गणपति यज्ञ / षष्ठार्चन

विघ्नहर्ता श्री गणेश के निमित्त षष्ठार्चन एवं महायज्ञ, जो सभी कार्यों को निर्विघ्न संपन्न करता है।

पूजा शुल्क₹7,100
शिव यज्ञ / षष्ठार्चन
3 घंटेघर • मंदिर

शिव यज्ञ / षष्ठार्चन

देवाधिदेव महादेव की प्रसन्नता और कृपा प्राप्ति के लिए विशेष शिव यज्ञ व षष्ठार्चन।

पूजा शुल्क₹7,100
प्रायोजित
लक्ष्मी यज्ञ / षष्ठार्चन
3 घंटेघर • मंदिर

लक्ष्मी यज्ञ / षष्ठार्चन

आर्थिक संकटों के निवारण और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी षष्ठार्चन एवं हवन।

पूजा शुल्क₹7,100
विष्णु यज्ञ / षष्ठार्चन
3 घंटेघर • मंदिर

विष्णु यज्ञ / षष्ठार्चन

जगतपालक भगवान श्री हरि विष्णु का षष्ठार्चन एवं यज्ञ, जिससे घर-परिवार में प्रेम और शांति बनी रहती है।

पूजा शुल्क₹7,100
दुर्गा यज्ञ / षष्ठार्चन
3 घंटेघर • मंदिर

दुर्गा यज्ञ / षष्ठार्चन

शत्रु बाधा निवारण, आत्मबल और सुरक्षा के लिए भगवती दुर्गा का षष्ठार्चन एवं यज्ञ।

पूजा शुल्क₹7,100
नवचंडी पाठ
3 घंटेघर • मंदिर

नवचंडी पाठ

9 दिनों तक श्री दुर्गा सप्तशती का 9 बार नवाह पाठ एवं नवचंडी यज्ञ।

पूजा शुल्क₹18,000
शतचंडी पाठ
5 घंटेघर • मंदिर

शतचंडी पाठ

7 वरिष्ठ आचार्यों द्वारा 5 दिनों में 100 चंडी पाठ एवं भव्य शतचंडी महायज्ञ।

पूजा शुल्क₹1,21,000
एकादशी उद्यापन
2 घंटेघर • मंदिर

एकादशी उद्यापन

वर्ष भर के एकादशी व्रतों की पूर्णता पर विधिपूर्वक उद्यापन, हवन एवं ब्राह्मण भोज।

पूजा शुल्क₹7,100
प्रदोष उद्यापन
2 घंटेघर • मंदिर

प्रदोष उद्यापन

भगवान शिव और माता पार्वती के निमित्त किए गए प्रदोष व्रतों का विधिवत उद्यापन।

पूजा शुल्क₹5,100
सप्तवार उद्यापन
1 घंटाघर • मंदिर

सप्तवार उद्यापन

सप्ताह के वारों (सोमवार, गुरुवार, शनिवार आदि) के व्रतों की पूर्णता पर उद्यापन पूजन।

पूजा शुल्क₹3,100
पूर्णिमा उद्यापन
1 घंटाघर • मंदिर

पूर्णिमा उद्यापन

पूर्णिमा व्रत की पूर्णता पर श्री सत्यनारायण पूजन, कथा एवं विधिवत उद्यापन।

पूजा शुल्क₹5,100
नवरात्रि पूजा (मानक पैकेज)
2 घंटेघर • मंदिर

नवरात्रि पूजा (मानक पैकेज)

नवरात्रि पूजा मानक पैकेज - घटस्थापना एवं दैनिक पूजन व्यवस्था।

पूजा शुल्क₹3,100
घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा (मानक पैकेज)
2 घंटेघर • मंदिर

घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा (मानक पैकेज)

मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा घर के मंदिर में नवीन देव प्रतिमा (विग्रह) की स्थापना हेतु संपन्न कराया जाने वाला एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है। इस अनुष्ठान के माध्यम से वैदिक मंत्रोच्चार और शास्त्रीय विधियों द्वारा विग्रह में दिव्य चेतना व 'प्राण' का संचार किया जाता है, जिससे प्रतिमा एक जाग्रत देव स्वरूप में प्रतिष्ठित होती है। भक्तजन अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक शांति, वास्तु शुद्धि तथा ईश्वर के निरंतर सान्निध्य व आशीर्वाद की प्राप्ति हेतु यह पूजा संपन्न कराते हैं। पूजन का आरंभ आचमन, संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह आह्वान से होता है। इसके उपरांत प्रतिमा का सांकेतिक शुद्धि अधिवास (जैसे जलाधिवास या धान्याधिवास) कराकर पंचामृत, गंगाजल और सुगंधित इत्र से महाअभिषेक किया जाता है। तत्पश्चात प्रतिमा को नवीन सुंदर वस्त्र, आभूषण, मुकुट और जनेऊ अर्पित कर विधिवत श्रृंगार किया जाता है। मुख्य अनुष्ठान में प्राण प्रतिष्ठा मंत्रों और न्यास द्वारा विग्रह में देवत्व का आह्वान किया जाता है, जिसके बाद शहद व छोटे दर्पण की सहायता से 'नेत्रोन्मीलन' (नेत्र खोलने की रस्म) संपन्न की जाती है। अनुष्ठान का समापन वातावरण शुद्धि हवन, प्रथम महाभोग अर्पण, महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ होता है। सामग्री: नवीन देव प्रतिमा (विग्रह), चौकी या सिंहासन, लाल अथवा पीला वस्त्र, कलश, नारियल, आम के पत्ते, पंचामृत (कच्चा दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), गंगाजल, गुलाब जल, इत्र, भगवान के नए वस्त्र व आभूषण, जनेऊ, चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत, ताजे फूल, पुष्पमाला, तुलसी दल/दूर्वा/बेलपत्र (इष्टदेव अनुसार), छोटा दर्पण, कुशा, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, ऋतु फल, मिठाई या खीर, हवन कुंड, हवन सामग्री, सूखा गोला, कपूर, धूप, अगरबत्ती, दीपक, शुद्ध गाय का घी, रुई की बत्ती और प्रसाद। नोट: मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा पंचांग के अनुसार निकाले गए अत्यंत शुभ मुहूर्त में ही संपन्न कराई जानी चाहिए। प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात घर के मंदिर में नित्य पूजन, संध्या दीप प्रज्वलन और दैनिक सात्विक भोग का नियमपूर्वक पालन करना अनिवार्य माना जाता है। इष्टदेव के स्वरूप और कुल परंपरा के अनुसार पूजन विधि तथा आवश्यक सामग्री में आंशिक भिन्नता हो सकती है।

पूजा शुल्क₹5,100
घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा (विस्तारित पैकेज)
3 घंटेघर • मंदिर

घर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा (विस्तारित पैकेज)

विस्तारित प्राण प्रतिष्ठा पैकेज - न्यास, षोडशोपचार, जलाधिवास एवं हवन सहित।

पूजा शुल्क₹9,100
प्रायोजित
रुद्राभिषेक - 3 पंडित
2 घंटेघर • मंदिर

रुद्राभिषेक - 3 पंडित

3 वैदिक पंडितों द्वारा विशेष रुद्राभिषेक पैकेज।

पूजा शुल्क₹9,100
रुद्राभिषेक - 5 पंडित
2 घंटेघर • मंदिर

रुद्राभिषेक - 5 पंडित

5 ब्राह्मणों द्वारा शुक्ल यजुर्वेदीय मंत्रोच्चार सहित महा रुद्राभिषेक।

पूजा शुल्क₹15,000
रुद्राभिषेक + नमक चमक पाठ - 11 पंडित
3 घंटेघर • मंदिर

रुद्राभिषेक + नमक चमक पाठ - 11 पंडित

11 वैदिक आचार्यों द्वारा संपूर्ण नमकम-चमकम पाठ एवं एकादश रुद्राभिषेक।

पूजा शुल्क₹33,000