तीज का त्योहार: सोलह श्रृंगार से लेकर मेहंदी तक, ऐसे करें तैयारी
- द्वारा प्रार्थना संपादकीय टीम
- प्रकाशित: July 30, 2026
- अंतिम अपडेट: July 30, 2026
- 10 Mins

भारत विविधताओं का देश है, और यहाँ हर मौसम, हर अवसर एक उत्सव लेकर आता है। इन्हीं उत्सवों में से एक है तीज का त्योहार, जो खासकर उत्तर भारत में बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव से मनाया जाता है। यह पर्व, भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और मिलन का प्रतीक है, और सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेकर आता है। प्रकृति जब अपनी हरी चुनर ओढ़ लेती है, सावन की फुहारें मन को भिगोने लगती हैं, तब आता है हरियाली तीज का मनमोहक पर्व। इस दिन महिलाएं न सिर्फ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, बल्कि सोलह श्रृंगार करके और हाथों में मेहंदी रचाकर अपनी आस्था और प्रेम को भी अभिव्यक्त करती हैं।
आइए, हम सब मिलकर इस पावन पर्व की गहराई में उतरें और जानें कि तीज का त्योहार क्या है, इसका महत्व क्या है, इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं क्या हैं, और कैसे सोलह श्रृंगार और मेहंदी के साथ इसकी तैयारी की जाती है।
तीज का त्योहार: महत्व और आध्यात्मिक गहराई
तीज का त्योहार मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है - हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज। इनमें से हरियाली तीज सावन मास में आती है और इसका विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, और उनकी यह तपस्या 108 जन्मों के बाद सफल हुई। सावन मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से यह दिन सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, स्वस्थ जीवन और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए मनाया जाता है। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।
यह पर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और स्त्रीत्व के उत्सव का भी प्रतीक है। सावन के महीने में प्रकृति हरी-भरी होकर एक नई ऊर्जा का संचार करती है, और महिलाएं भी हरे रंग के वस्त्र धारण कर झूले झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और इस उत्सव को जीवंत बनाती हैं।
तीज से जुड़ी पौराणिक कथा
तीज का त्योहार माता पार्वती और भगवान शिव के प्रेम और त्याग की कहानी कहता है। आइए जानते हैं इस अद्भुत कथा को:
बहुत समय पहले की बात है, जब माता सती ने दक्ष के यज्ञ में अपने शरीर का त्याग कर दिया था। भगवान शिव गहन शोक में डूब गए और कठोर तपस्या में लीन हो गए। उधर, पर्वतराज हिमालय और मैना के घर माता पार्वती का जन्म हुआ। बचपन से ही माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में स्वीकार कर लिया था और उन्हें प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या करने का निश्चय किया।
माता पार्वती ने अन्न-जल त्याग कर, कई वर्षों तक जंगल में रहकर कठोर तपस्या की। उन्होंने अपना सारा जीवन भगवान शिव को समर्पित कर दिया था। उनकी तपस्या इतनी प्रबल थी कि स्वयं शिवजी भी उनके सामने प्रकट होने को विवश हो गए। लेकिन शिवजी ने उनकी परीक्षा लेने के लिए कई बार भेष बदलकर उन्हें अपनी तपस्या से विचलित करने का प्रयास किया। माता पार्वती अपने निश्चय पर अडिग रहीं।
अंततः, सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव ने माता पार्वती को दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वचन दिया। यह दिन माता पार्वती के लिए एक नई शुरुआत लेकर आया, उनके प्रेम और त्याग की विजय का दिन था। तभी से, इस दिन को अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की कामना से मनाया जाने लगा। भगवान शिव ने माता पार्वती को आशीर्वाद दिया कि जो भी स्त्री इस दिन श्रद्धापूर्वक मेरा और तुम्हारा पूजन करेगी, उसे अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
तीज पूजा विधि: व्रत और अनुष्ठान
तीज का त्योहार अपने विशेष पूजा विधि और कठोर व्रत के लिए जाना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करती हैं। आइए जानें इसकी विस्तृत पूजा विधि:
1. व्रत का संकल्प और तैयारी
- स्नान और शुद्धि: तीज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की तैयारी: पूजा के लिए एक साफ-सुथरी जगह का चुनाव करें। एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
- संकल्प: हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत का संकल्प लें। कुंवारी कन्याएं उत्तम वर की प्राप्ति का संकल्प ले सकती हैं।
2. पूजा सामग्री
पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री पहले से एकत्रित कर लें:
- भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएं (या तस्वीर)
- फूल, बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल
- घी का दीपक, धूप, अगरबत्ती
- मिठाई (विशेषकर घेवर, मालपुआ) और फल
- पान, सुपारी, लौंग, इलायची
- नारियल
- सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, आभूषण (माता पार्वती के सोलह श्रृंगार के लिए)
- अक्षत (चावल), रोली (कुमकुम), चंदन
- जल से भरा कलश
- एक थाली में बताशे या मिश्री
- दूर्वा घास
3. पूजा का विधान
- विग्रह स्थापना: चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें।
- जल अर्पण: सबसे पहले कलश के जल से सभी देवी-देवताओं को स्नान कराएं।
- वस्त्र और आभूषण: माता पार्वती को लाल वस्त्र, सिंदूर, चूड़ियां और सभी श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव को धोती और जनेऊ अर्पित करें।
- चंदन और रोली: सभी देवताओं को चंदन और रोली का तिलक लगाएं।
- पुष्प और पत्तियां: शिवजी को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, शमी पत्र और माता पार्वती को लाल फूल विशेष रूप से अर्पित करें।
- धूप और दीप: धूप जलाएं और घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- भोग: मिठाई (घेवर, मालपुआ), फल और अन्य पकवानों का भोग लगाएं।
- तीज व्रत कथा: पूजा के दौरान तीज व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। यह कथा व्रत के महत्व और फल को बढ़ाती है।
- आरती: कथा समाप्त होने के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आरती करें।
- क्षमा याचना: पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
4. व्रत पारण
पूजन समाप्त होने के बाद महिलाएं चांद निकलने का इंतजार करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पारण के लिए पानी पीकर और हल्का भोजन (जैसे फल, मिठाई) ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
सोलह श्रृंगार: नारी सौंदर्य और आस्था का प्रतीक
सोलह श्रृंगार भारतीय संस्कृति में नारी के सौंदर्य, सुहाग और समृद्धि का प्रतीक है। तीज का त्योहार बिना सोलह श्रृंगार के अधूरा माना जाता है। इस दिन हर सुहागिन स्त्री इन सोलह श्रृंगारों से सजती है और अपनी पति के प्रति प्रेम और सम्मान को व्यक्त करती है। आइए जानते हैं इन सोलह श्रृंगार की हर एक वस्तु का अर्थ और महत्व:
- सिंदूर (Vermillion): यह सुहाग का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है। मांग में सिंदूर भरना पति की लंबी उम्र और सौभाग्य का सूचक है। यह लाल रंग ऊर्जा और प्रेम का भी प्रतीक है।
- बिंदी (Bindi): माथे पर बिंदी लगाना एकाग्रता, बुद्धि और देवी शक्ति का प्रतीक है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता लाती है।
- मांग टीका (Maang Tika): यह माथे के मध्य में पहना जाने वाला आभूषण है, जो मस्तिष्क के आज्ञा चक्र पर स्थित होता है। यह देवी शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाता है।
- काजल (Kajal/Kohl): काजल आँखों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ बुरी नजर से बचाता है और आँखों को ठंडक प्रदान करता है।
- नथ (Nose Ring): नथ या नथनी नाक में पहनी जाती है, जो नारी के सौंदर्य और स्त्रीत्व को बढ़ाती है। इसे सुहाग का भी प्रतीक माना जाता है।
- कर्णफूल/कान की बालियां (Earrings): कान में बालियां पहनने से चेहरे की सुंदरता बढ़ती है और यह ध्वनि ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
- हार/गले का आभूषण (Necklace): गले में पहना जाने वाला हार सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक है। यह हृदय चक्र को भी प्रभावित करता है।
- बाजूबंद (Armlets): बाजू में पहने जाने वाले बाजूबंद नारी शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक हैं। यह भुजाओं को सुंदर बनाते हैं।
- चूड़ियाँ/कंगन (Bangles): हाथों में चूड़ियां पहनना सुहाग का सबसे प्रमुख चिन्ह है। इनकी खनक घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और यह स्त्री के स्वास्थ्य से भी जुड़ा है।
- अंगूठी (Rings): उंगलियों में पहनी जाने वाली अंगूठियां सौंदर्य के साथ-साथ ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करने में भी सहायक मानी जाती हैं।
- कमरबंद (Waistband): कमर में पहना जाने वाला कमरबंद नारी के आकर्षक स्वरूप को निखारता है और शरीर को सुडौल दिखाता है।
- पायल (Anklets): पैरों में पायल पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इनकी खनक घर में देवी लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक मानी जाती है।
- बिछिया (Toe Rings): पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनना सुहाग का चिन्ह है। यह माना जाता है कि यह प्रजनन क्षमता और रक्तचाप को नियंत्रित करती है।
- मेहंदी (Henna): हाथों और पैरों पर मेहंदी रचाना शुभता, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक है। मेहंदी का गहरा रंग पति के गहरे प्रेम को दर्शाता है।
- इत्र/सुगंध (Perfume): शरीर पर सुगंध लगाना पवित्रता, ताजगी और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह मन को शांत और प्रसन्न रखता है।
- वस्त्र (Attire - साड़ी/लेहंगा): सुंदर और पारंपरिक वस्त्र (जैसे लाल या हरे रंग की साड़ी या लेहंगा) पहनना नारी के संपूर्ण श्रृंगार को पूर्णता प्रदान करता है।
इन सोलह श्रृंगारों से सजी महिलाएं तीज के त्योहार पर देवी पार्वती का ही प्रतिरूप लगती हैं, जो प्रेम, त्याग और भक्ति की मिसाल हैं।
मेहंदी डिज़ाइन: हाथों में रचता प्रेम का रंग
तीज का त्योहार बिना मेहंदी के अधूरा है। मेहंदी सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि प्रेम, सौभाग्य और उत्सव का प्रतीक है। हाथों में मेहंदी रचाना इस पर्व की एक अनिवार्य रस्म है, जिसका रंग जितना गहरा होता है, पति-पत्नी के बीच प्यार उतना ही गहरा माना जाता है। बाजार में और घरों में महिलाएं विभिन्न प्रकार की मेहंदी डिज़ाइन बनवाती हैं। आइए जानते हैं कुछ लोकप्रिय डिज़ाइन:
1. राजस्थानी मेहंदी (Rajasthani Mehendi)
- विशेषता: यह सबसे पारंपरिक और विस्तृत मेहंदी डिज़ाइन होती है। इसमें पूरे हाथ (कलाई से कोहनी तक) और पैरों को बारीक और जटिल पैटर्न से भरा जाता है।
- पैटर्न: इसमें मोर, हाथी, राजा-रानी, कलश, फूल-पत्तियां, जालियां और धार्मिक प्रतीक जैसे स्वास्तिक, ओम आदि का उपयोग होता है। उंगलियों और हथेली पर बेहद महीन काम होता है।
- अवसर: तीज, शादियों और बड़े उत्सवों के लिए यह सबसे पसंदीदा डिज़ाइन है।
2. अरेबिक मेहंदी (Arabic Mehendi)
- विशेषता: यह राजस्थानी मेहंदी की तुलना में थोड़ी खुली और बोल्ड होती है। इसमें एक फ्लोरल या वाइन पैटर्न हाथ के एक तरफ से शुरू होकर उंगलियों तक जाता है, जिससे त्वचा का काफी हिस्सा खाली रहता है।
- पैटर्न: इसमें बड़े फूल, पत्तियां, बेलें और ज्यामितीय आकार प्रमुख होते हैं। यह जल्दी लग जाती है और जल्दी सूख जाती है।
- अवसर: तीज सहित किसी भी छोटे-बड़े अवसर के लिए यह मॉडर्न और आकर्षक विकल्प है।
3. मॉडर्न/मिनिमल मेहंदी (Modern/Minimal Mehendi)
- विशेषता: यह आजकल की लड़कियों और महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय है, जिन्हें कम समय में सुंदर और स्टाइलिश डिज़ाइन चाहिए होता है। इसमें छोटे और सरल पैटर्न होते हैं।
- पैटर्न: एक उंगली पर डिज़ाइन, कलाई पर ब्रेसलेट डिज़ाइन, टैटू स्टाइल मेहंदी, छोटे फूल या पत्ते, या सिर्फ हथेली के बीच में एक मंडला डिज़ाइन।
- अवसर: यह उन लोगों के लिए एकदम सही है जो सादगी और एलिगेंस पसंद करते हैं, और इसे रोजमर्रा के अवसरों पर भी लगाया जा सकता है।
कुछ अन्य लोकप्रिय मेहंदी डिज़ाइन:
- इंडो-अरेबिक मेहंदी: यह राजस्थानी और अरेबिक शैलियों का मिश्रण है, जहाँ कुछ हिस्सों में जटिलता और कुछ में खुलापन होता है।
- फ्लोरल मेहंदी: इसमें सिर्फ फूलों और पत्तियों के पैटर्न का उपयोग होता है, जो बहुत ही सुंदर और प्राकृतिक लगते हैं।
चाहे आप कोई भी डिज़ाइन चुनें, मेहंदी लगाने के बाद उसे कम से कम 4-6 घंटे तक सूखने दें। सूखने के बाद उस पर नींबू और चीनी का मिश्रण लगाएं, जिससे रंग गहरा हो। अगले दिन तक पानी के संपर्क से बचाएं ताकि रंग अच्छे से चढ़े।
तीज की तैयारी के लिए व्यावहारिक सुझाव
तीज का त्योहार खुशियों और तैयारियों का पर्व है। आइए कुछ व्यावहारिक सुझावों पर गौर करें, जिनसे आप इस पर्व को और भी खास बना सकती हैं:
1. पोशाक का चुनाव (Attire Selection)
- रंग: तीज का त्योहार हरियाली और नवजीवन का प्रतीक है, इसलिए हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। लाल, पीला, नारंगी और गुलाबी रंग भी बहुत शुभ होते हैं।
- पारंपरिक परिधान: पारंपरिक साड़ी (बनारसी, कांजीवरम, सिल्क) या लेहंगा-चोली सबसे उपयुक्त रहते हैं। आप शरारा, गरारा या पारंपरिक सूट भी पहन सकती हैं।
- फैब्रिक: मौसम को ध्यान में रखते हुए हल्के और आरामदायक फैब्रिक चुनें जैसे सिल्क, जॉर्जेट या शिफॉन, जो आपको पूरे दिन व्रत के दौरान सहज महसूस कराएं।
2. आभूषण और साज-सज्जा (Jewellery and Adornments)
- पारंपरिक आभूषण: अपनी पोशाक से मेल खाते हुए सोने या चांदी के पारंपरिक आभूषण जैसे भारी झुमके, गले का हार, चूड़ियां, कंगन, अंगूठी और मांग टीका पहनें।
- फूलों के आभूषण: आजकल ताजे फूलों के आभूषण भी बहुत चलन में हैं, जो हरियाली तीज के लिए विशेष रूप से उपयुक्त लगते हैं।
- मेहंदी: एक दिन पहले ही हाथों और पैरों पर सुंदर मेहंदी लगवा लें।
3. घर की साज-सज्जा (Home Decor)
- साफ-सफाई: त्योहार से पहले घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें।
- सजावट: घर को फूलों, आम के पत्तों, रंगोली और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाएं। हरा रंग और पीले रंग की सजावट इस अवसर पर बहुत सुंदर लगती है।
- झूले: तीज का त्योहार झूलों के बिना अधूरा है। यदि संभव हो, तो घर के अंदर या बालकनी में एक सुंदर झूले की व्यवस्था करें और उसे फूलों और रंगीन कपड़े से सजाएं।
4. खान-पान की तैयारी (Food Preparations)
- पारण के लिए भोजन: व्रत खोलने के लिए पारंपरिक मिठाइयां जैसे घेवर, मालपुआ, फनी और अन्य फल, मेवे आदि तैयार रखें।
- उपवास के नियम: निर्जला व्रत रखने से पहले या अगर आप फलाहार व्रत रख रही हैं, तो शरीर को हाइड्रेटेड रखने का ध्यान रखें।
5. अन्य महत्वपूर्ण तैयारियां
- सिंधारा/बायना: यदि आपकी शादी हाल ही में हुई है, तो मायके से आने वाले सिंधारा (मिठाई, कपड़े, श्रृंगार सामग्री) की तैयारी करें। यह ससुराल में भेजा जाने वाला एक तोहफा होता है।
- उपहार: यदि आप अपनी सास, ननद या अन्य परिवारजनों को उपहार देना चाहती हैं, तो उन्हें पहले से खरीद कर रख लें।
- पूजा सामग्री: पूजा के लिए आवश्यक सभी सामग्री को एक दिन पहले ही इकट्ठा कर लें ताकि अंतिम समय की भागदौड़ से बचा जा सके।
- सामाजिक मेलजोल: यह पर्व परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशी मनाने का भी अवसर है। आसपास की महिलाओं के साथ मिलकर गीत गाएं और झूले झूलें।
इन तैयारियों के साथ, आप तीज का त्योहार पूरी श्रद्धा, उत्साह और आनंद के साथ मना पाएंगी।
निष्कर्ष
तीज का त्योहार सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, प्रेम, त्याग और अटूट आस्था का प्रतीक है। यह पर्व हमें भगवान शिव और माता पार्वती के शाश्वत प्रेम की याद दिलाता है और प्रकृति के साथ हमारे गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है। सोलह श्रृंगार, हाथों में रची मेहंदी और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं इस दिन अपनी आस्था और प्रेम को अभिव्यक्त करती हैं। यह मौका है अपनी संस्कृति से जुड़ने का, परिवार के साथ समय बिताने का और वैवाहिक जीवन में प्रेम और सद्भाव को गहरा करने का।
हम आशा करते हैं कि यह विस्तृत जानकारी आपको तीज के त्योहार को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाने में सहायक होगी। आप सभी को तीज का त्योहार बहुत-बहुत मुबारक हो! यह पर्व आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य लेकर आए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: तीज का त्योहार क्या है?
तीज का त्योहार उत्तर भारत में हर्षोल्लास और भक्तिभाव से मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और मिलन का प्रतीक है।
Q: तीज का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
यह पर्व सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, स्वस्थ जीवन और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए मनाया जाता है। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।
Q: तीज का त्योहार कितने प्रकार का होता है?
तीज का त्योहार मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है - हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज।
Q: हरियाली तीज कब मनाई जाती है?
हरियाली तीज सावन मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है।
Q: तीज के त्योहार पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
तीज का त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, और इस दिन उन्हीं की पूजा की जाती है।
Q: माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए क्या किया था?
माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अन्न-जल त्याग कर, कई वर्षों तक जंगल में रहकर कठोर तपस्या की थी।
Q: सुहागिन महिलाएं तीज पर क्या विशेष तैयारी करती हैं?
तीज पर सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और हाथों में मेहंदी रचाकर अपनी आस्था और प्रेम को अभिव्यक्त करती हैं।
Q: कुंवारी कन्याएं तीज का व्रत क्यों रखती हैं?
कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से तीज का व्रत रखती हैं।
Q: सोलह श्रृंगार का तीज के त्योहार में क्या महत्व है?
तीज के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके अपने पति के प्रति अपने प्रेम और अखंड सौभाग्य की कामना को अभिव्यक्त करती हैं।
Q: मेहंदी का तीज के त्योहार में क्या महत्व है?
तीज के अवसर पर हाथों में मेहंदी रचाना शुभता, सौंदर्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, और यह त्योहार की महत्वपूर्ण तैयारी का हिस्सा है।
Q: भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में कब स्वीकार किया था?
भगवान शिव ने सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वचन दिया था।
Q: तीज का त्योहार भारत के किन क्षेत्रों में प्रमुखता से मनाया जाता है?
तीज का त्योहार खासकर उत्तर भारत में बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव से मनाया जाता है।
Q: प्रकृति और तीज के त्योहार का क्या संबंध है?
सावन के महीने में प्रकृति हरी-भरी होकर एक नई ऊर्जा का संचार करती है, और तीज का पर्व प्रकृति और स्त्रीत्व के उत्सव का भी प्रतीक है।
Q: माता पार्वती के जन्म से पहले भगवान शिव की क्या स्थिति थी?
माता सती के दक्ष के यज्ञ में अपने शरीर का त्याग करने के बाद भगवान शिव गहन शोक में डूब गए और कठोर तपस्या में लीन हो गए थे।
Q: तीज पर्व पर महिलाएं आमतौर पर किस रंग के वस्त्र धारण करती हैं?
तीज पर्व पर महिलाएं हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं, जो प्रकृति की हरियाली और उत्सव की जीवंतता का प्रतीक है।
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