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तीज पूजा विधि: मां पार्वती को प्रसन्न करने के अचूक उपाय और मंत्र।

तीज पूजा विधि: मां पार्वती को प्रसन्न करने के अचूक उपाय और मंत्र।

तीज पूजा विधि: मां पार्वती को प्रसन्न करने के अचूक उपाय और मंत्र

भारतीय संस्कृति में त्योहारों का विशेष स्थान है, और इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन पर्व है तीज। यह पर्व मुख्यतः महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति की कामना के लिए मनाया जाता है। तीज का पर्व मां पार्वती और भगवान शिव के प्रेम, त्याग और अटूट मिलन का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं कठोर तीज व्रत रखती हैं और विशेष तीज पूजा विधि का पालन कर मां पार्वती को प्रसन्न करने का प्रयास करती हैं। यह ब्लॉग पोस्ट आपको तीज पूजा की विस्तृत विधि, आवश्यक सामग्री, शुभ मुहूर्त, मां पार्वती और भगवान शिव की कथा, व्रत के नियम और मां पार्वती को प्रसन्न करने वाले विशेष मंत्रों के बारे में गहन जानकारी प्रदान करेगा।

तीज क्या है?

तीज का शाब्दिक अर्थ 'तीसरा' होता है, क्योंकि यह पर्व अक्सर सावन या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में तीन प्रमुख तीज मनाई जाती हैं:

  • हरियाली तीज: सावन मास में मनाई जाती है, जब प्रकृति हरी-भरी होती है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है।
  • कजरी तीज: भाद्रपद मास में मनाई जाती है, जिसमें चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है।
  • हरतालिका तीज: भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है और यह सभी तीजों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें मां पार्वती की कठोर तपस्या और उनके शिव को पति रूप में पाने के संकल्प का स्मरण किया जाता है।

इस लेख में हम मुख्य रूप से हरतालिका तीज और उसकी तीज पूजा विधि पर ध्यान केंद्रित करेंगे, क्योंकि यह व्रत सबसे कठिन और फलदायी माना जाता है।

हरतालिका तीज का विशेष महत्व

हरतालिका तीज का नाम 'हरत' और 'आलिका' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'सहेली द्वारा हरण'। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती को उनके पिता हिमालय भगवान विष्णु से विवाह कराना चाहते थे, लेकिन माता पार्वती भगवान शिव को ही अपना पति मान चुकी थीं। तब उनकी सहेली उन्हें हरण करके एक घने जंगल में ले गई, ताकि वे भगवान शिव की तपस्या कर सकें। इसी कारण इस तीज को हरतालिका तीज कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से महिलाएं मां पार्वती जैसी अदम्य इच्छाशक्ति और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

मां पार्वती और भगवान शिव की कथा: प्रेम, त्याग और तपस्या का प्रतीक

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। जब वे अपने पूर्व जन्म में सती थीं, तो उन्होंने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने पति के अपमान से क्रोधित होकर अग्नि में स्वयं को भस्म कर लिया था। अगले जन्म में उन्होंने हिमालयराज की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही माता पार्वती ने भगवान शिव को अपना पति मान लिया था।

भगवान शिव उस समय सती वियोग में गहन तपस्या में लीन थे और विवाह से विरक्त थे। माता पार्वती ने उन्हें प्रसन्न करने के लिए अन्न-जल त्याग कर हिमालय पर गहन तपस्या प्रारंभ की। उन्होंने वर्षों तक पत्तों को भी त्याग कर 'अपर्णा' का रूप धारण किया, सिर्फ हवा और जल पर जीवित रहीं। उनकी तपस्या इतनी कठोर थी कि देवताओं का भी सिंहासन डोलने लगा।

देवताओं ने कामदेव को भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए भेजा, लेकिन भगवान शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया। इसके बाद भी मां पार्वती ने अपनी तपस्या नहीं छोड़ी। अंततः भगवान शिव ने माता पार्वती की परीक्षा लेने के लिए सप्त ऋषियों को भेजा, जिन्होंने शिव की बुराई की और पार्वती को दूसरे योग्य वर से विवाह करने की सलाह दी। लेकिन माता पार्वती अपने निश्चय पर अडिग रहीं और उन्होंने कहा कि वे शिव के अतिरिक्त किसी और को पति रूप में स्वीकार नहीं कर सकतीं, भले ही उन्हें यह जन्म ही क्यों न त्यागना पड़े।

मां पार्वती की ऐसी दृढ़ता, निष्ठा और प्रेम को देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने स्वयं प्रकट होकर माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया और उनसे विवाह किया। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम, दृढ़ संकल्प और निष्ठा से किए गए प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाते। हरतालिका तीज का व्रत इसी कथा की याद दिलाता है और महिलाओं को मां पार्वती के समान दृढ़ता और भक्ति का संदेश देता है।

तीज व्रत का महत्व और लाभ

तीज व्रत का भारतीय संस्कृति में अत्यधिक महत्व है। यह व्रत मुख्यतः निम्न लाभों के लिए रखा जाता है:

  • अखंड सौभाग्य: विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • मनचाहा वर: कुंवारी कन्याएं मां पार्वती से मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • संतान सुख: कुछ महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का पालन करती हैं।
  • पारिवारिक सुख-शांति: यह व्रत घर में सुख, समृद्धि और शांति लाता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: कठोर तपस्या और भक्ति के माध्यम से आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

यह व्रत प्रेम, त्याग और विश्वास का प्रतीक है, जो हर महिला को मां पार्वती के दिव्य गुणों से जोड़ता है।

तीज पूजा विधि: चरण-दर-चरण गाइड

तीज पूजा विधि अत्यंत विस्तृत और श्रद्धा भाव से की जाने वाली पूजा है। इसका प्रत्येक चरण महत्वपूर्ण है।

शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज की पूजा प्रदोष काल (संध्या काल) में की जाती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भी पूजा प्रारंभ करने का विधान है। शुभ मुहूर्त जानने के लिए आप किसी पंडित से सलाह ले सकते हैं या पंचांग का सहारा ले सकते हैं। सामान्यतः, तृतीया तिथि के दिन सूर्योदय के साथ ही व्रत प्रारंभ हो जाता है और रात्रि जागरण के बाद अगले दिन सुबह व्रत का पारण किया जाता है।

पूजा सामग्री की सूची

तीज पूजा विधि के लिए निम्नलिखित सामग्री पहले से एकत्रित कर लें:

  • देवताओं की प्रतिमाएं: भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मिट्टी या बालू से बनी प्रतिमाएं या चित्र।
  • पूजा स्थल: एक चौकी या पटरा।
  • वस्त्र: लाल या पीला शुद्ध वस्त्र चौकी पर बिछाने के लिए।
  • कलश: तांबे या मिट्टी का एक कलश।
  • स्थापना हेतु: कलश के नीचे रखने के लिए थोड़े से जौ या गेहूं, कलश में भरने के लिए गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल।
  • श्रृंगार सामग्री (सुहाग पिटारी): चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, आलता, महावर, बिछिया, काजल, कंघी, दर्पण, साड़ी या ओढ़नी (मां पार्वती को अर्पित करने के लिए)।
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल।
  • अभिषेक सामग्री: शुद्ध जल, गुलाब जल।
  • तिलक सामग्री: रोली, चंदन, कुमकुम, सिंदूर।
  • अक्षत: साबुत चावल।
  • पुष्प: विभिन्न प्रकार के फूल जैसे गुलाब, कमल, गेंदा आदि, फूलों की माला।
  • बेलपत्र: भगवान शिव को अति प्रिय।
  • शमी के पत्ते: यदि उपलब्ध हों।
  • धतूरा, आक के फूल: भगवान शिव के लिए।
  • धूप-दीप: अगरबत्ती, धूपबत्ती, घी का दीपक।
  • नैवेद्य: फल, मिठाई (घेवर, गुजिया आदि), सूखे मेवे, पान, सुपारी, लौंग, इलायची।
  • अन्य सामग्री: कपूर, मौली (लाल धागा), नारियल, आम के पत्ते, दक्षिणा।
  • पूजा पुस्तक: तीज व्रत कथा की पुस्तक।

पूजन विधि (विस्तृत चरण)

तीज पूजा विधि का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ करें:

  1. व्रत का संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा आरंभ करने से पहले, दाहिने हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर "ॐ मम सुख सौभाग्य पुत्र पौत्रादि समृद्धये हरतालिका व्रतं करिष्ये" मंत्र बोलते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा स्थल की तैयारी: घर के ईशान कोण या पूर्व दिशा में एक स्वच्छ स्थान पर चौकी स्थापित करें। उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
  3. शिव-पार्वती की स्थापना: चौकी के मध्य में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं या चित्र स्थापित करें। (विशेष रूप से हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित करने का विधान है)।
  4. कलश स्थापना: चौकी के दाईं ओर एक कलश स्थापित करें। कलश के नीचे जौ या गेहूं रखें। कलश में जल भरें, गंगाजल मिलाएं, सुपारी, सिक्का, अक्षत डालें और आम के पांच पत्तों को कलश के मुख पर रखकर उस पर नारियल रखें। नारियल पर मौली बांधें।
  5. आवाहन और ध्यान: सभी देवी-देवताओं का ध्यान करें और उन्हें अपनी पूजा स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करें।
  6. पंचामृत स्नान: सबसे पहले गणेश जी को फिर शिव-पार्वती को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं। फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
  7. वस्त्र अर्पण: भगवान शिव को श्वेत वस्त्र या जनेऊ, माता पार्वती को लाल साड़ी या ओढ़नी और गणेश जी को वस्त्र या जनेऊ अर्पित करें।
  8. तिलक: भगवान शिव को चंदन, गणेश जी को रोली और माता पार्वती को कुमकुम और सिंदूर लगाएं।
  9. पुष्प अर्पण: सभी देवी-देवताओं को पुष्प और फूलों की माला अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल विशेष रूप से चढ़ाएं। माता पार्वती को लाल फूल विशेष प्रिय हैं।
  10. धूप-दीप प्रज्वलन: घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती जलाएं।
  11. सुहाग सामग्री अर्पण: मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, आलता आदि) अर्पित करें। यह सामग्री उन्हें सुहागिन स्त्रियां अपने अखंड सौभाग्य की कामना के लिए चढ़ाती हैं।
  12. नैवेद्य अर्पण: फल, मिठाई, सूखे मेवे, पान, सुपारी, लौंग, इलायची आदि का भोग लगाएं।
  13. तीज व्रत कथा श्रवण: हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। यह इस पूजा का एक अनिवार्य हिस्सा है।
  14. आरती: कथा सुनने के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आरती उतारें।
  15. मंत्र जप: मां पार्वती को प्रसन्न करने के लिए विशेष मंत्रों का जप करें (नीचे दिए गए मंत्र देखें)।
  16. क्षमा याचना: पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए भगवान शिव और मां पार्वती से क्षमा याचना करें।
  17. प्रदक्षिणा: सामर्थ्य अनुसार परिक्रमा करें।
  18. दान: पूजा के बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को दक्षिणा और सामग्री दान करें।
  19. रात्रि जागरण: कई महिलाएं रात भर जागरण करती हैं, भजन-कीर्तन करती हैं और शिव-पार्वती की कथाएं सुनती हैं। यह भी इस व्रत का एक महत्वपूर्ण अंग है।

मां पार्वती को प्रसन्न करने के विशेष मंत्र

तीज पूजा विधि के दौरान और उसके बाद इन मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी होता है। ये मंत्र मां पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक होते हैं:

1. मां पार्वती मूल मंत्र:

ॐ पार्वत्यै नमः।

2. विवाह बाधा निवारण और सौभाग्य वृद्धि के लिए मंत्र:

हे गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया।

तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकातां सुदुर्लभाम्॥

3. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

4. भगवान शिव और पार्वती को एक साथ प्रसन्न करने के लिए:

ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः।

5. भगवान शिव का पंचाक्षर मंत्र:

ॐ नमः शिवाय।

6. महामृत्युंजय मंत्र (यह मंत्र भी पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए जपा जा सकता है):

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

इन मंत्रों का जप रुद्राक्ष की माला से 108 बार या अपनी श्रद्धा अनुसार कर सकते हैं।

तीज व्रत के नियम

तीज व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, और इसके पालन में कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • निर्जीला व्रत: हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है, अर्थात व्रत के दौरान जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। कुछ महिलाएं अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार फलाहार या जलाहार व्रत रखती हैं, लेकिन निर्जला व्रत का विशेष महत्व है।
  • क्रोध और कटु वचन त्यागें: व्रत के दौरान मन को शांत रखें, क्रोध और कटु वचन से बचें।
  • दिन में न सोएं: व्रत के दिन दिन में सोना वर्जित माना जाता है।
  • शारीरिक संबंध: व्रत के दिन शारीरिक संबंध बनाना वर्जित है।
  • सात्विक भोजन: व्रत के एक दिन पहले से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और पूजा के बाद भी पारण सात्विक भोजन से ही करें।
  • दान करें: अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।
  • सोलह श्रृंगार: इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके ही पूजा करती हैं, यह उनके सौभाग्य का प्रतीक है।

तीज व्रत का पारण विधि

व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। पूजा समाप्त होने और माता पार्वती को भोग लगाने के बाद, महिलाएं अपने पति के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेती हैं। इसके बाद वे जल पीकर और अर्पित किए गए प्रसाद को ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं। पारण के समय सबसे पहले जल ग्रहण करें, उसके बाद कोई फल या हल्का सात्विक भोजन लें। कोशिश करें कि व्रत का पारण किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराने के बाद ही करें।

निष्कर्ष

तीज पूजा विधि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। हरतालिका तीज का यह पावन पर्व मां पार्वती की तपस्या, भगवान शिव के प्रति उनकी निष्ठा और उनके अमर प्रेम की कहानी को जीवंत करता है। इस व्रत को सच्चे मन और श्रद्धा के साथ रखने वाली सभी सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं, वहीं कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। मां पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे और आपका जीवन सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो।

इस तीज व्रत के माध्यम से आप भी मां पार्वती के समान दृढ़ता और भक्ति को अपने जीवन में अपनाएं और उनके आशीर्वाद से अपने सभी मनोरथ पूर्ण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: तीज का पर्व क्यों मनाया जाता है?

तीज का पर्व मुख्यतः महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति की कामना के लिए मनाया जाता है। यह मां पार्वती और भगवान शिव के प्रेम, त्याग और अटूट मिलन का प्रतीक है।

Q: तीज का शाब्दिक अर्थ क्या है और यह कब मनाई जाती है?

तीज का शाब्दिक अर्थ 'तीसरा' होता है, क्योंकि यह पर्व अक्सर सावन या भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है।

Q: भारत में प्रमुख रूप से कौन-कौन सी तीज मनाई जाती हैं?

भारत में तीन प्रमुख तीज मनाई जाती हैं: हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज।

Q: हरतालिका तीज का क्या महत्व है?

हरतालिका तीज सभी तीजों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन मां पार्वती की कठोर तपस्या और उनके शिव को पति रूप में पाने के संकल्प का स्मरण किया जाता है। यह व्रत सबसे कठिन और फलदायी माना जाता है।

Q: हरतालिका तीज का नाम 'हरत' और 'आलिका' से कैसे बना है?

हरतालिका तीज का नाम 'हरत' और 'आलिका' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'सहेली द्वारा हरण'। यह माता पार्वती की सहेली द्वारा उन्हें हरण कर जंगल में तपस्या के लिए ले जाने की कथा से जुड़ा है।

Q: हरतालिका तीज व्रत रखने से महिलाओं को क्या लाभ मिलता है?

हरतालिका तीज का व्रत रखने से महिलाएं मां पार्वती जैसी अदम्य इच्छाशक्ति और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

Q: माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए क्या तपस्या की थी?

माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अन्न-जल त्याग कर हिमालय पर गहन तपस्या प्रारंभ की थी। उन्होंने वर्षों तक पत्तों को भी त्याग कर 'अपर्णा' का रूप धारण किया और केवल हवा व जल पर जीवित रहीं।

Q: इस ब्लॉग पोस्ट में किस तीज पूजा विधि पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है?

इस ब्लॉग पोस्ट में मुख्य रूप से हरतालिका तीज और उसकी तीज पूजा विधि पर ध्यान केंद्रित किया गया है, क्योंकि यह व्रत सबसे कठिन और फलदायी माना जाता है।

Q: तीज का पर्व किस देवी-देवता को समर्पित है?

तीज का पर्व मुख्य रूप से मां पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है, जो उनके प्रेम, त्याग और अटूट मिलन का प्रतीक है।

Q: हरियाली तीज और हरतालिका तीज में मुख्य अंतर क्या है?

हरियाली तीज सावन मास में मनाई जाती है और भगवान शिव व माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है और मां पार्वती की कठोर तपस्या के स्मरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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प्रार्थना संपादकीय टीम

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